
Birbhum : पश्चिम बंगाल में आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के एवज में ली गयी रिश्वत की रकम ‘कटमनी’ वापस लौटाने का पहला मामला राज्य के बीरभूम जिले में सामने आया है.
रुपये लौटाने वाले तृणमूल नेता का नाम त्रिलोचन मुखर्जी है. वह बीरभूम जिले के सिउड़ी में पार्टी का बूथ अध्यक्ष है.
इसे भी पढ़ें : दुर्गापुर से मुंबई के बीच दैनिक उड़ान शुरू
खुश हैं रुपये वापस पाने वाले
त्रिलोचन ने मंगलवार को सिउड़ी के छातरा गांव के निवासी 141 श्रमिकों को बुलाकर उनके पैसे लौटाये. प्रत्येक मजदूर को 1560 रुपये कटमनी लौटाये गये.
100 दिनों के रोजगार योजना के तहत मजदूरों को काम कराने के बाद उनके वेतन से ये रुपये जबरदस्ती लिये गये थे. अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर गांव वाले काफी खुश हैं.
इसे भी पढ़ें : नियम कानून का हवाला देकर पीड़िता को इलाज से रखा वंचित
ममता हुईं आक्रामक
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकारी परियोजनाओं से घूस लेने वालों के खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू की है. उन्होंने ठोस निर्देश दिया है कि जिन किसी भी नेताओं, मंत्रियों, पार्षदों और अन्य लोगों ने आम लोगों का काम कराने के बदले कटमनी लिया है वह बिना देरी किए रुपये लौटाएं.
जून महीने के मध्य में ही मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिया था लेकिन आज तक पूरे राज्य में इस पर खामोशी बनी रही थी. हर जगह घूस लेने वालों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हैं लेकिन कहीं से भी रुपये लौटाने वाले सामने नहीं आये थे.
ऐसा माना जा रहा था कि जो सामने आकर रुपये देगा वह अपने आप को भ्रष्ट साबित करेगा.लेकिन त्रिलोचन ने इस सबकी परवाह किए बगैर मंगलवार को मजदूरों को बुलाकर पैसा वापस किया है.
उन्होंने कहा कि पार्टी का ऐसा कोई नेता नहीं है जो पैसा नहीं लेता और 100 दिनों की रोजगार योजना हो या कोई और परियोजना हर जगह सुविधा लेने वाले लोगों से रुपये लिये जाते रहे हैं. मैंने भी लिया था और मुख्यमंत्री के निर्देश पर मैं उसे लौटा दे रहा हूं.
इसे भी पढ़ें : गाय-बछड़ों के साथ धरने पर बैठे महिला-पुरुष, मुआवजा और नौकरी की मांग
मनरेगा के पैसे खुद नेता उठाता था
बताया गया है कि 100 दिनों के रोजगार योजना के लिए जो रुपये आते थे, वह आता तो सीधे मजदूरों के खाते में जाता था लेकिन उसे उठाने का जिम्मा इस तृणमूल नेता का ही था.
छातरा गांव के निवासी कमल माल ले बताया कि उन्हें भी रुपये वापस मिले हैं। कमल ने कहा कि हमलोग 100 दिनों के रोजगार योजना के तहत काम करते थे लेकिन हमारा बैंक खाता बूथ अध्यक्ष के पास ही रहता था। जब बैंक में रुपये आ जाते थे तो पैसा उठाने वाले फॉर्म पर हमलोगों से जबरदस्ती हस्ताक्षर करवा लेते थे और पैसा उठा लेते थे। उसमें से अपना हिस्सा रखकर बांकी रकम हमें दे दिया जाता था.
सोमनाथ माल नाम के एक अन्य मजदूर ने बताया कि जब वास्तविक रुपया हमलोग मांगते थे तो हमें मारने-पीटने एवं पुलिस केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी। पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर छोटे स्तर तक किसी को भी बोलने से कोई लाभ नहीं होता था इसलिए हमलोग चुप रहते थे.
जिन लोगों को कटमनी वापस मिला है उनमें से अधिकतर लोगों ने कहा कि जबसे मुख्यमंत्री ने कटमनी वापस लेने का निर्देश दिया है उसके बाद उन्हें हिम्मत मिली है. हमलोगों ने अपने बूथ अध्यक्ष से अपना पैसा मांगा था. उन्होंने कई दिनों से टाल बहाना किया था लेकिन अब जब सारे गांववासी एक होने लगे थे तब उन्होंने मंगलवार को बुलाकर खाता पर हस्ताक्षर कराकर सबका पैसा लौटाया है.
हालांकि गांव वालों का कहना था कि उन्होंने हजारों रुपये लिये हैं लेकिन केवल 1560 रुपये लौटाये हैं.
इसे भी पढ़ें : पलामू टाइगर रिजर्व के लिए केंद्र ने दिये 10.28 करोड़ रुपये
कटमनी की जांच के लिये आयोग गठित करने की मांग पर विधानसभा में हंगामा
कटमनी को लेकर राज्य विधानसभा में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन हंगामा जारी रहा. इस राज्यव्यापी भ्रष्टाचार की जांच के लिए आयोग गठित करने की मांग पर विपक्ष के नेताओं ने नारेबाजी की और विधानसभा से वॉकआउट किया.
विधानसभा में विपक्षी विधायकों ने इस मामले पर पश्चिम बंगाल सरकार से श्वेत पत्र प्रकाशित करने की मांग की. इसके साथ ही कटमनी मामले की जांच के लिए आयोग गठित करने की मांग को लेकर भी विपक्षी पार्टियां आक्रामक रहीं.
इसे भी पढ़ें : नियुक्ति नियमावली बनने के बाद भी नहीं निकाला गया एएनएम, जीएनएम अनुबंधकर्मियों की नियुक्ति का विज्ञापन, हड़ताल में कर्मी




