
Girish Malviya
इधर आप दिल्ली में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में उलझे रहे और उधर मोदी सरकार ने अडानी- अंबानी को कौड़ियों के भाव में बड़ी संपत्तियां और कंपनियों को देने-दिलाने की तैयारियां पूरी कर ली.
खबर आयी कि आलोक इंडस्ट्रीज को मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जेएम फाइनेंशियल असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर खरीद लिया.
सबसे अधिक हैरत की बात यह है कि आलोक इंडस्ट्रीज पर बैंकों का कुल 30,000 करोड़ रुपए बकाया था. लेकिन रिलायंस को सामने देखकर एनसीएलटी की अहमदाबाद पीठ ने मार्च 2019 में रिलायंस-जेएम फाइनेंशियल एआरसी के मात्र 5,050 करोड़ रुपए की अकेली बोली को मंजूरी दे दी.
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आलोक इंडस्ट्रीज औने-पौने दाम में रिलायंस खरीद सके, इसलिए मोदी सरकार ने 2018 में कानून ही बदल डाला. दरअसल अप्रैल 2018 के मध्य में हुई बैठक में रिलायंस और जेएम एआरसी के 5,050 करोड़ रुपये के ऑफर पर 70 पर्सेंट कर्जदाता बैंकरों ने ही सहमति दी थी.
लेकिन तब ये सौदा नकार दिया गया था, इसकी सबसे बड़ी वजह एक नियम था. जिसके तहत ऐसे रिजॉल्यूशन प्लान की मंजूरी के लिए कम से कम 75 पर्सेंट कर्जदाताओं की सहमति जरूरी है.अब यहां मोदी सरकार का रोल शुरू होता है.
मोदी सरकार ने यह स्थिति इस 75 प्रतिशत ऋणदाताओं की मंजूरी वाले कानून में ढील देने वाला संशोधन पास कर दिया. आईबीसी में संशोधन से योजना की मंजूरी के लिए न्यूनतम मत को 75 से घटाकर 66 फीसदी कर दिया गया. इससे आलोक इंडस्ट्रीज की संयुक्त समाधान योजना के मंजूर होने की राह आसान हो गयी.
आरआईएल-जेएमएफ एआरसी द्वारा जमा करायी गयी योजना के अनुसार, दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से 5005 करोड़ रुपये में आलोक इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण करने जा रही हैं, जिनमें से बैंकों को मात्र 4000 करोड़ रुपये मिलेंगे.
आलोक इंडस्ट्रीज पर वित्तीय कर्जदाताओं का करीब 30 हजार करोड़ रुपये बकाया है, यानी इस सौदे से बैंकों को 86 फीसदी से ज्यादा का नुकसान उठाना होगा. आलोक इंडस्ट्रीज के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया जून 2017 में एसबीआई ने शुरू की थी. जो कंपनी का लीड बैंक था. सबसे अधिक नुकसान उसे ही झेलना पड़ेगा.
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अब अडानी जी के बारे भी कुछ पढ़ लीजिए, कुछ दिनों पहले गौतम अडानी की अगुवाई वाली अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को नई दिल्ली के अल्ट्रा पॉश इलाके लुटियंस जोन के भगवान दास रोड पर बने एक शानदार बंगले की नया मालिक बना दिया गया.
एक सदी से भी ज्यादा पुराने इस दो मंजिला बंगले को अडानी ग्रुप ने आदित्य एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से दिवालिया कार्यवाही के बाद खरीद लिया. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस संपत्ति की कीमत केवल 265 करोड़ रुपये बतायी.
जबकि कुछ साल पहले इसकी कीमत इसके मालिकों ने 1000 करोड़ रूपए लगाई थी. बंगला 3.5 एकड़ में फैला हुआ है, वर्तमान में इसका मूल्य और भी अधिक था. लेकिन रस्ते का माल सस्ते में अडानी जी को सौंप दिया गया.
सच तो यह कि मोदी जी के सबसे बड़े आर्थिक सुधार कहे जाने वाले इंसोल्वेंसी एंड बैंक करप्सी कोड का मूल उद्देश्य ही यह है कि हजारों करोड़ के कर्ज डूबाकर बैठी कंपनियों को अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को बेहद कम कीमत में बेच कर उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया जाये और जनता को हाथ ऊंचे कर के दिखा दिये जाये कि हम क्या करें? यह ओपन बोली थी!
यह है असली न्यू इंडिया. आप इधर हिन्दू-मुस्लिम में उलझे रहिए, देश की बड़ी-बड़ी संपत्तियां कौड़ियों के मोल में अडानी-अंबानी को सौंप दी जाएगी. ऐसे ही नहीं मोदी राज में इन दोनों की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से बढ़ रही है. पर इससे आपको क्या.
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