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#Corona: गिरिडीह के क्वारेंटाइन सेंटर में दस-दस दिन बिता चुके लोगों को सैंपल लिये जाने का इंतजार, 886 की रिपोर्ट भी पेंडिंग

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Giridih: कोरोना के सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण गिरिडीह प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गयी है क्योंकि महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों का क्वांरटीन पीरियड समाप्त होने को है.

कई प्रवासियों के क्वांरटीन में रहने का वक्त खत्म होने की तिथि नजदीक आ रही है लेकिन अभी तक ऐसे प्रवासियों के सैंपल तक नहीं लिये गये.

ताजातरीन बानगी शहर के बोड़ो स्थित दुर्गा मंडप के समीप सामुदायिक भवन में रह रहे प्रवासी मजदूरों की है. इसी सेंटर में कुछ प्रवासी 10 दिनों से हैं तो कुछ पांच दिनों से, लेकिन इनके सैंपल भी अब तक नहीं लिये गये.

इधर स्वास्थ विभाग द्वारा लिये गये सैंपलों में 886 सैंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं आयी है जबकि बीते शनिवार को ही 128 और लोगों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गये.

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लक्षण नहीं मिले तो बिना टेस्ट के भी मुक्त किये जा सकते हैं मजदूर

दूसरी तरफ दूसरे जिलों के सैंपल के रिपोर्ट तेजी से पॉजिटिव आ रहे हैं लेकिन इस मामले में गिरिडीह स्वास्थ विभाग के हाथ खाली हैं.

इसी से चिंतित हो कर डीसी राहुल सिन्हा अब तक कई बार स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार तक कर चुके हैं. बावजूद कोई पहल अब तक नहीं की गयी.

स्वास्थ विभाग के सूत्रों की मानें तो पेंडिग में पड़े ये 886 सैंपल 10 दिन पहले के हैं जबकि हाल में कई और सैंपल भी भेजे गये जिसमें जमुआ गोरो गांव निवासी मुंबई से लौटे प्रवासी मजदूर की मौत के बाद उसके कांटेक्ट ट्रेसिंग में आये 45 लोगों के सैंपल भी शामिल हैं.

बहरहाल, जिले के क्वांरटीन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूर जहां काफी परेशान है वहीं इनकी परेशानी के बाद डीसी का भी कहना है कि क्वांरटीन सेंटर में जो प्रवासी और गैर प्रवासी रह रहे हैं अगर उनमें कोई लक्षण नहीं मिलते हैं,  तो वैसे लोगों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुक्त किया जा सकता है.

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बिना राज्य सरकार की गाडलाइन के खुल गयीं गिरिडीह शहर में कई दुकानें

सोमवार से लॉकडाउन के पांचवें चरण की शुरुआत हो रही है लेकिन इसको लेकर गृह मंत्रालय से जारी गाइडलाइन के बाद ही रविवार को ही शहर और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र का बुरा हाल दिखा.

कपड़ों से लेकर जूता-चप्पलों की दुकानें खुली हुई थीं जबकि अभी सिर्फ गृह मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन जारी की गयी है ना कि राज्य सरकार ने कोई गाइडलाइन जारी की है.

हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से फिलहाल कपड़ा और जूता-चप्पलों के दुकानों को खोलने का कोई निर्देश नहीं है.

यही नहीं, शहर के कई बड़े और छोटे इलेक्ट्रिक सामान, पंखा-कूलर की दुकानें खुली हुई पायी गयीं जहां सामाजिक दूरी के नियमों को तोड़कर दुकानदार जहां समानों को बेच रहे थे, वहीं ग्राहक भी नियमों की धज्जियां ही उड़ाते दिखे.

शहर की चुनिंदा इलेक्ट्रिक दुकानों के भीतर के नजारे बेहद खौफनाक थे. ना तो दुकानदार ही दुकानों में मास्क लगाये हुए थे और ना ही ग्राहकों के चेहरे पर मास्क नजर आया.

यहां तक कि इन इलेक्ट्रिक दुकानों के कांउटरों पर सैनेटाइजर भी नहीं रखा गया था. बगैर सैनेटाइजर के कई कारोबारी बेखौफ दुकानदारी करते नजर आये.

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