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#MNREGA: 50 दिनों में बाहर से झारखंड लौटे 70809 लोगों के बने जॉब कार्ड, 107684 लोगों को मिल सकेगा काम

  • प्रवासी कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा बना कारगर हथियार

Pravin kumar

Ranchi: प्रवासी मजदूर लाखों की संख्या में गांव लौट रहे हैं. इनके लिए रोजगार का अवसर सृजित करना राज्य सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है. ऐसे में मनरेगा एक विकल्प के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रहा है.

कारोना काल में ही 70809 नये जॉब कार्ड बने हैं. इन जॉब कार्ड के आधार पर 107684 लोगों को काम से जुड़ने का अवसर मिला है.

प्राप्त सूचना के अनुसार झारखंड में प्रतिदिन 1500 से 3000 हजार नये जॉब कार्ड बन रहे हैं. नये कार्ड बनाने वालों में से 90 प्रतिशत प्रवासी मजदूर हैं जो पिछले 50 दिनों में राज्य लौटे हैं.

मुख्यमंत्री द्वारा मनरेगा अंतर्गत तीन नयी योजनाओं की राज्य में शुरुआत की गयी है जिसमें नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, वीर शहीद फोटो खेल विकास योजना शामिल हैं. इन योजनाओं में युद्धस्तर पर कार्य प्रारंभ किया गया है.

करोना संक्रमण के दौर में श्रमिकों की स्थिति अत्यंत दयनीय बन गयी है. देश की बड़ी आबादी जो अंसगठित क्षेत्र के मजदूरों की है, इनमें दिहाड़ी मजदूरी की संख्या अधिक है जिनके समक्ष ‘रोज कमाओ रोज खाओ’ जैसी स्थिति बनी हुई है.

झारखंड सरकार की ओर से संचालित दाल- भात योजना, मुख्यमंत्री दीदी किचन एवं अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से चलने वाली किचन में लम्बी लाइन है.

यह इशारा करती है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है न ही दो वक्त खाने को भोजन घरों में है. लॉकडाउन का असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर भी घातक रूप से पड़ा है.

लेकिन, अभी उनकी स्थिति सामान्य नहीं है. कोरोना काला में कमगारों को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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क्या कहते हैं मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी

मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी के अनुसार, राज्य लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार से जोड़ने के लिए मनरेगा योजना बड़ी भूमिका निभा रही है. झारखंड में करीब 49 लाख ग्रामीण परिवार जॉब कार्ड होल्डर हैं.

एक्टिव जॉब कार्ड करीब 22 लाख परिवारों के पास हैं. एक्टिव मजदूरों की संख्या करीब 29 लाख है. झारखंड में हर साल औसतन 14 लाख परिवारों के 18 से 19 लाख लोग मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं.

इस समय लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में मजदूर गांव में पहले से मौजूद हैं. पहले इनमें से कई लोग शहरों में भी काम करने जाया करते थे, जो अब बंद है.

अब जाहिर है कि अब एक्टिव जॉब कार्ड की संख्या बढ़ेगी और इसे ध्यान में रखते हुए ब्लूप्रिंट पर काम किया जा रहा है.

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झारखंड में मनरेगा के तहत एक कार्य दिवस के बदले मिलते हैं 194 रुपये

मनरेगा योजना में प्रति कार्य दिवस मजदूरी 194 रुपये है लेकिन यह मजदूरी दल अन्य कई राज्यों से कम है. योजना के तहत मजदूरों को पर्सनल असेट खड़े हो इसके लिए मजदूर के खेत में तालाब की खुदाई या कुएं का निर्माण या फिर जानवरों के लिए शेड का निर्माण कराया जाता है.

मनरेगा के तहत व्यक्तिगत एसेट यानी अपनी संपत्ति बनाने के मामले में जोर दिया जाता है. इस योजना के तहत तीन नयी योजना शुरू की गयी है उसमें नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना भी मजदूरों को व्यक्तिगत एसेट बनाने में सहायक है.

किस जिले में कितने बने हैं नये जॉब कार्ड

प्रवासी मजदूरों की राज्य वापसी के बाद नये जॉब कार्ड बड़े पैमाने पर बनाये जा रहे हैं. लेकिन इस समय सवाल यह किया जा रहा है कि क्या लॉकडाउन की वजह से वापस लौटे प्रवासी मजदूर राज्य में रुकेंगे?

इस पर झारखंड नरेगा वॉच के संयोजक जेम्स कहते हैं- हमारे पास जो इनपुट हैं उसके अनुसार मात्र दस फीसद लोग बाहर जायेंगे और वे जाएं भी तो क्यों? जब उन्हें घर में ही काम मिल जाएगा तो वे भला बाहर क्यों जाएंगे? लेकिन मनरेगा योजना में राज्य में काम उपल्बध कराने की स्थिति ठीक नहीं रही है.

जिला

नये बने जॉब कार्ड

बोकारो 6174
चतरा 814
देवघर 1928
धनबाद 3502
दुमका 2780
ईस्टसिंहभूम 3703
गढ़वा 3066
गिरिडीह 4161
गोड्डा 4520
गुमला 1946
हजारीबाग 2802
जामताड़ा 4014
खूंटी 2027
कोडरमा 3104
लातेहार 2562
लोहरदगा 598
पाकुड़ 1355
पलामू 3250
रामगढ़ 2067
रांची 2360
साहेबगंज 6415
सरायकेला-खरसावां 2668
सिमडेगा 1477
वेस्ट सिंहभूम 3590

कुल 

70809

 

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