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पुलिस ने न की होती कोताही, तो शायद जिंदा होते ये लोग

  • जमीन विवाद की घटनाएं थाना पहुंचने के बाद भी थानेदार नहीं दिखाते गंभीरता
  • हत्या होने के बाद आरोपी को जेल भेजकर दिखाते हैं अपनी उपलब्धि

Dheeraj Singh

Ranchi: CASE (1)- 1 जनवरी 2021 की रात लालपुर थाना क्षेत्र स्थित करम टोली के समीप जमीन विवाद में सोनू टोप्पो नामक युवक की हत्या कर दी गयी. जमीन विवाद का मामला पहले ही थाना पहुंच चुका था, लेकिन पुलिस ने उस समय गंभीरत नहीं दिखायी. नतीजा हत्या की घटना के रूप में सामने आया.

CASE (2)- 21 दिसंबर 2020 की सुबह एक रिटायर्ड फौजी ने खेल गांव थाना क्षेत्र स्थित लालगंज में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी जबकि दूसरे व्यक्ति को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया. इस मामले में भी पीड़ित पक्ष की ओर से थाना में पहले ही आवेदन देकर आरोपी के बारे में बताया गया था कि उनके जमीन पर उसकी नजर है और कभी भी हत्या जैसी घटना का अंजाम दिया जा सकता है. लेकिन उस वक्त पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखायी और हत्या की वारदात हो गयी.

CASE (2)- 20 दिसंबर को जगन्नाथपुर इलाके के हेसाग बस्ती में ऐसी ही घटना हुई जिसमें पुलिस के सामने चाकू से गला रेत कर अलाउद्दीन नामक युवक की हत्या कर दी गयी.

ऊपरोक्त तीनों आपराधिक मामलों में जो बातें कॉमन हैं, वो यह कि तीनों घटनाएं जमीन विवाद में हुईं और वारदात के पहले जमीन विवाद की बात पुलिस तक पहुंच चुकी थी. अगर पुलिस ने उसी समय एक्शन लिया होता तो हत्या जैसी वारदात को टाला जा सकता था.
लगातार हो रही घटनाएं

राजधानी के विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार जमीन विवाद की घटनाएं हो रही हैं. इन मामलों में पीड़ित लोग थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराते रहे हैं. लेकिन ऐसे मामलों में पुलिस टाल मटोल करते हुए पीड़ित पक्ष को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की नसीहत देकर थाने से लौटा देती हैं.

जमीन विवाद के मामलों को सुलझाने के बजाय थानेदार तत्परता के साथ 107 और 144 के तहत मामला दर्ज कर आवेदन को एसडीओ कोर्ट में फॉरवर्ड कर देते हैं. पुलिस की यही लापरवाही लोगों के लिए परेशानियों का सबब बन रही है.

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हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाती है पुलिस

जमीन विवाद में आये दिन अक्सर हत्या की घटनाएं हो रही हैं. हत्या होने के बाद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है और इसे अपनी उपलब्धि मानते हुए पीठ थपथपाती है. पुलिस की कार्यशैली से लोग इतने ज्यादा आहत हो चुके हैं कि जमीन के विवाद होने के बाद अब थाना जाने से भी परहेज करने लगे हैं.

जमीन विवाद में अनुसंधान करने और मामले को सुलझाने के लिए होने वाले विभिन्न तरह की परेशानियों से बचने के लिए पुलिस पूरे मामले को कोर्ट में ले जाने की नसीहत देते हुए अपना पल्ला झाड़ लेती है.

हाल के दिनों में दर्जनों ऐसी घटनाएं हो चुकी है जिसमें जमीन विवाद का मामला थाना पहुंच चुका है लेकिन पुलिस की दिलचस्पी नहीं लेने की वजह से हत्या जैसी घटनाओं का अंजाम दिया जा चुका है.

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