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मां बेटे की मौत मामले में पीड़ित परिजनों से मिले कांग्रेस-झामुमो के नेता, हर संभव मदद का आश्वासन

DEVGHAR: जसीडीह थाना के चरकीपहाड़ी गांव में मां-बेटे की मौत मामले में कांग्रेस व झामुमो के नेता रविवार को मृतक के परिजनों से मिले. मखिया सुगिया देवी व किशन चौधरी की आत्मा की शांति व परिजनों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया. कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुन्नम संजय, झारखंड मुक्ति मोर्चा के महानगर अध्यक्ष सुरेश साह एवं प्रखंड अध्यक्ष विपिन यादव मृतक के घर पहुंचने वालों में शामिल हैं.

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झामुमो नेता सुरेश साह ने कहा कि हृदय को झकझोर देने वाली इस घटना पर सबों की गहरी संवेदना है. झारखंड सरकार के स्थानीय मंत्री बादल पत्रलेख एवं हाफिजुल हसन के प्रतिनिधि के रूप हम सभी यहां पहुंचे हैं. उन्होंने भी घटना पर दुख जताया और कहा है कि राज्य सरकार मृतक के आश्रितों को हर संभव सरकारी सुविधाओं से लाभान्वित करने का कार्य करेगी. कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुन्नम संजय ने कहा कि कृषि मंत्री बादल पत्रलेख अपने विवेकाधीन निधि से मृतक की पत्नी पूजा देवी को खाते के माध्यम से दस हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान करेंगे एवं मृतक किशन चौधरी की पत्नी को विधवा पेंशन, अंबेडकर आवास एवं अन्य योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. मृतक की पुत्री को कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराया जाएगा. इनको हर संभव सरकार व पार्टी की ओर से मदद पहुंचाया जाएगा. तत्काल तीन बोरा खाद्यान्न परिजनों को उपलब्ध कराया गया है. साथ ही जिला प्रशासन की ओर से अंचलाधिकारी द्वारा तत्काल राहत हेतु दो बोरा अनाज एवं नकद राशि उपलब्ध कराया गया है.

 

क्या है पूरा मामला

बिते शनिवार को दिवघर जिले के जसीडीह थाना क्षेत्र के चरकीपहाड़ी गांव में एक लड़के ने केवल इस वजह से आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके पास अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे. किशन की मां पिछले तीन साल से लकवाग्रस्त होने के कारण काफी बीमार रहती थी, शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई. उसके अगले दिन शनिवार सुबह को छोटा लड़का किशन चौधरी का शव फांसी के फंदे से झूलता मिला. परिजनों ने बताया कि मृत युवक दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था. लॉकडाउन के कारण उसे प्रतिदिन मजदूरी का काम भी नहीं मिल पाने के कारण परिवार चलाने में भी कठिनाई हो रही थी. वह अपनी मां के वृद्धा पेंशन और सरकारी राशन पर निर्भर रह रहा था. मां की मृत्यु हो जाने के बाद उसके सामने दाह-संस्कार और श्राद्धकर्म के लिए लिए पैसे नहीं थे. हालांकि बड़े भाई मनोहर चौधरी ने भरोसा दिया था कि किसी प्रकार की समस्या नहीं होने देंगे, परंतु उनकी भी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. अंतत: किशन ने यह कदम उठा लिया. मृत युवक विवाहित था और उसके दो बेटे व एक बेटी भी है.

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