
Ranchi : राजधानी रांची में कोरोना काल में निजी स्कूलों की ओर मनमानी फीस वृद्धि और फीस नहीं देने वाले बच्चों को पढ़ाई से रोकने के खिलाफ अभिभावक संघ ने आवाज उठायी है. इसके बाद उपायुक्त छवि रंजन ने जांच टीम गठित करने का निर्देश जारी किया है. उपायुक्त के इस निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए रांची के निजी विद्यालय एकजुट हुए हैं.
सहोदया से जुड़े निजी स्कूलों की वर्चुअल बैठक रविवार को हुई. बैठक में कहा गया कि उपायुक्त का आदेश शिक्षण-कार्य एवं विद्यालय की कार्य प्रणाली के अस्तित्व को मिटा सकता है. यह भी हो सकता है कि शिक्षण संस्थान बंद करने पड़े. इस बैठक में 40 से अधिक स्कूलों के प्राचार्य और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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मालूम हो कि स्कूलों में हो रही मनमानी को लेकर डीसी को कई अभिभावकों ने पत्र के माध्यम से सूचना दी थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए डीसी ने जांच टीम का गठन किया है. जांच में दोषी पाये जानेवाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश है.
सहोदया की बैठक में एक स्वर में कहा गया कि सरकार और अभिभावकों को ये समझने की ज़रूरत है कि केवल ट्यूशन फीस से स्कूल के खर्चे नहीं चलते हैं. शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन के अतिरिक्त बिलिंग तथा बसों के लोन के ई. एम.आई, बिल्डिंग मेंटेनेंस कॉस्ट, बिल्डिंग टैक्स, इलेक्ट्रिक बिल, टेलीफोन बिल, कंप्यूटर मेंटेनेंस, स्मार्ट बोर्ड का ई.एम.आई, बसों के टैक्स, फिटनेस, परमिट, खेल मैदान के मेंटेनेंस तथा अन्य खर्चे भी होते हैं. वहीं खलासी, बस-चालक, माली, चपरासी, लिपिक, दरबान आदि को भी वेतन देने पड़ते हैं. केवल ट्यूशन फीस ये सब नहीं हो जाता है. सहोदया की बैठक में तय हुआ कि सभी प्राचार्य सरकार को इस संदर्भ में ज्ञापन सौपेंगे और उपायुक्त के आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे.
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बैठक में कहा गया कि शिक्षा जगत के लोग उपायुक्त के आदेश से आहत हुए हैं. निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त के आदेश को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर करार कर दिया है. कहा गया कि कोविड – 19 महामारी के प्रभाव के कारण जून 2020 में जारी आदेश के अनुसार यह मामला अभी भी विचाराधीन है. इस परिस्थिति में उपायुक्त द्वारा प्राइवेट स्कूल के खिलाफ आदेश जारी करना विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों पर गहरा आघात है. यह आदेश विद्यालय के मूलभूत आवश्यकताओं को छीनने का प्रयास है. मौजूदा बदली हुई परिस्थिति में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सरकार शुल्क के लिए दिशा निर्देश जारी नहीं कर सकती है. कोविड – 19 महामारी को देखते हए उच्चतम न्यायालय का निर्णय पूरे भारत वर्ष में लागू होता है.




