
NewDelhi : इस साल देश में अब तक मॉनसून कमजोर दिख रहा है. मॉनसून सीजन के लगातार चौथे सप्ताह में भी बारिश कम देखने को मिली है. देश के मध्य और पश्चिमी हिस्से में कम बारिश होने की खबर है. इसके चलते देश के बड़े हिस्से में फसलों के उत्पादन को लेकर आशंकाएं पैदा हो गयी हैं.
जानकारों के अनुसार इसका असर इकॉनमी पर पड़ने की संभावना है. जान लें कि देश में कृषि उत्पादन और आर्थिक ग्रोथ के लिए मॉनसून की बारिश अहम रही है.
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55 पर्सेंट कृषि भूमि मॉनसूनी बारिश पर निर्भर
रिपोर्ट के अनुसार भारत की 55 पर्सेंट कृषि भूमि सिंचाई के लिए मॉनसूनी बारिश पर निर्भर है. एशिया की तीसरी सबसे बड़ी और 2.5 ट्रिलियन की इकॉनमी वाले भारत की जीडीपी में 15 फीसदी हिस्सेदारी देश की कृषि की है.
इस साल जनवरी से मार्च तिमाही में बीते चार सालों में सबसे कम गति से ग्रोथ करने वाली इकॉनमी के लिए मॉनसून का कमजोर रहना चिंता का विषय है. यदि अगले दो से तीन सप्ताह में बारिश की स्थिति अच्छी नहीं होती है तो फिर फसल की बुआई प्रभावित होगी.
मॉनसून दो से तीन सप्ताह के भीतर वापसी नहीं करता है तो…
इसके अलावा ट्रैक्टर से लेकर लेकर फर्टिलाइजर तक और किसानों के लिए अन्य तमाम उत्पाद बेचने वाली कंपनियों के लिए यह चिंता की बात होग. इंडिट्रेड डेरिवेटिव्स ऐंड कमोडिटीज में कमोडिटीज ऐंड करंसी हेड हरीश गलीपेल्ली ने कहा, बुआई पहले ही तीन सप्ताह के करीब लेट हो चुकी है . यदि मॉनसून दो से तीन सप्ताह के भीतर वापसी नहीं करता है तो फिर पूरा सीजन ही बेकार हो सकता है.
मौसम विभाग के 26 जून तक के डेटा के अनुसार बीते 50 साल के औसत में इस मॉनसून सीजन में 24 पर्सेंट कम बारिश हुई है. कुछ हिस्सों में यह कमी 69 फीसदी तक देखने को मिली है. जैसे पूर्वी मध्य प्रदेश में जहां सोयाबीन की बुआई होती है. बारिश की कमी के कारण धान, मक्का और सोयाबीन की बुआई कम होने की आशंका है.
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