
Dilip Kumar
Palamu: सरकारी राशि का दुरूपयोग कैसे होता है, अगर यह देखना और जानना है तो पलामू जिला मुख्यालय डालटनगंज चले आएं. यहां नियम के खिलाफ आपको कई कार्य नजर आयेंगे जिससे आप हैरत में पड़ जायेंगे. पशुपालन विभाग का पेट (पशु) क्लिनीकि तो इसका बड़ा उदाहरण बन सकता है.
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पशुपालकों के किसी काम की नहीं पेट क्लिनिक
मेदिनीनगर सदर प्रखंड कार्यालय सटे पशु चिकित्सालय परिसर में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया पेट क्लिनीक वर्षों से बेकार है. सुसज्जित भवन और इसमें लगाये गये महंगे-महंगे उपकरण शोभा की वस्तु बन गये हैं. दरअसल, पद सृजन नहीं होने के कारण लाखों की लागत से बनाया गया यह पेट क्लिनिक पशुपालकों के किसी काम का नहीं.
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सरकार की प्लानिंग उजागर
सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा बिना पद सृजित किये बिना ही पेट क्लिनिक का निर्माण करा दिया जाना भी सरकार की शैली को उजागर करता है. जबकि किसी भी योजना की शुरूआत की जाती है तो उससे पहले आधारभूत सुविधाओ के साथ-साथ पद भी सृजित किये जाते हैं. और उसी के अनुरूप काम करना होता है, लेकिन जानवरों के इलाज के लिए बनाये गये इस पेट क्लिनिक की कहानी इसके विपरीत है.
जानवरों के ऑपरेशन थियेटर और कई मशीनें लगी हैं
इस मॉडल पेट क्लिनिक में जानवरों के इलाज के लिए ऑपरेशन थियेटर से लेकर एक्स-रे माशीन, अल्ट्रा साउंड मशीन सहित कई महंगे उपकरण हैं. सूत्र बताते हैं कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ कमीशनखोरी के लिए भवन बनवाया और लाखों की मशीनें खरीद ली. लेकिन इसे चालू कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी. यही कारण है कि लाखों रूपये खर्च करने के बाद भी यह पेट क्लिनिक जनता के काम नहीं आ रहा.
न चिकित्सक हैं और न ही ऑपरेटर
सूत्र यह भी बताते हैं कि इसकी स्थापना का उदेश्य था लोगों के पालतू जानवरों का बेहतर इलाज. मगर विभाग की उदासीनता के कारण इसके संचालन के लिए न तो चिकित्सक ही बहाल किये गये और न ही इसमें लगे उपकरणों के लिए कोई ऑपरेटर या अन्य पद ही सृजित किये गये. यही वजह है कि लाखों के इस सरकारी भवन पर ताले लटक रहे हैं और भीतर लगे उपकरण को जंग खा रहे हैं.
पशुपालन पदाधिकारी ने नहीं दिया ठोस जवाब
एक तरफ सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर लाखों रूपये खर्च कर बनाये गये पेट अस्पतालों का यह हश्र देखकर कई सवाल जन्म लेते हैं. इस सवालों का जवाब लेने और सरकारी पक्ष जानने के लिए जिले के पशुपालन पदाधिकारी से मोबाइल पर संपर्क किया गया. लेकिन रांची में राज्यस्तरीय मीटिंग में होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी.
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