
Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में धूमधाम से विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. राजधानी से लेकर विभिन्न जिलों में अलग-अलग जन संगठन आदिवासी समूहों के द्वारा विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किये गये. रांची में भी विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विश्व आदिवासी दिवस पर रैली से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया. साथ ही आदिवासी अधिकारों पर हो रहे प्रहार पर विमर्श भी किया. आदिवासी जन परिषद द्वारा करमटोली चौक पर आदिवासी जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया कार्यकम्र में राज्य के आदिवासियों की मूलभूत मांग जल, जंगल, जमीन पर अधिकार एवं स्वायत्तता की मांग पर संघर्ष के लिए संकल्प लिया गया. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग रांची विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडे थे.
आदिवासियत की जीवन शैली से पूरा विश्व प्रेरणा ले रहा है
डॉ पांडे ने कहा कि आज पूरे विश्व में यदि पर्यावरण की रक्षा अगर कोई करता है तो वह है आदिवासी समाज. आदिवासी समाज ही एक ऐसा समाज है जिसने सभ्य समाज को जीने का सलीका सिखाया. आज पर्यावरण संकट गहरा गया है. इसलिए आज आदिवासियत की जीवन शैली से पूरा विश्व प्रेरणा ले रहा है. आदिवासी उलगुलान संगठन ने दीपाटोली में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में राज्य में आदिवासियों पर किये जा रहे अत्याचार और जमीन से बेदखली के मामले में आदिवासी संगठनों को संगठित होने का आह्वान किया गया. संत जोसेफ क्लब में जेआईपीएफ के द्वारा कार्यक्रम आयोजित हुआ. जिसमें आदिवासी समाज के उन अगुवाओं को सम्मानित किया गया, जो आदिवासी समाज के लिए लम्बे समय से काम कर रहे हैं. हटिया में भी विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. यहां आयोजित कार्यक्रम में सोलंकी, लठम, चांदघासी, बड़का टोली हटिया कई गांव के लोग शरीक हुए.
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आदिवासी दिवस तभी सफल होगा , जब आदिवासी संगठित होंगे
रांची विश्वविधालय के दीक्षांत मंडप में आदिवासी संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन शामिल हुए. अपने संबोधन हेमंत सोरेन ने कहा, जब देश के लोग आजादी का सपना भी नहीं देख रहे थे, तब आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हुआ. कहा कि आदिवासी समाज अपने पूर्वजों की शहादत और संघर्ष की वजह से अपना अस्तित्व बचाए हुए है. राज्य में जिस तरह आदिवासियों के अधिकारो पर प्रहार हो रहा है, हम अगर इनकी रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो आने वाली पीढ़ी को अपने हाथों से गला घोट देना चाहिए. दूसरों के हाथों से मरने से तो यह अच्छा है. राज्य में जब तक आदिवासियों को हक नहीं मिलेगा शहीदों का सपना पूरा नहीं होगा .
झारखंड विकास मोर्चा महासचिव बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासी दिवस तभी सफल होगा , जब आदिवासी संगठित होंगे. टुकड़े-टुकड़े में बंटे रहोगे तो आदिवासी दिवस मनाने का कोई फायदा नहीं. कहा गया कि किसी भी गांव,टोला में आदिवासियों की जमीन पर कोई व्यक्ति विवाद करता है, तो वैसे हालात में दूसरे टोले के लोग वहां जाकर उनकी मदद करें. कहा कि वर्तमान सरकार आदिवासियों की सरकार नहीं है. आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़िया सरकार को नेस्तोनाबूद करना होगा.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवरदास कहते हैं कि आदिवासियों की जमीन नहीं लूटी जा रही है. मैं उनसे पूछना चाहता हूं 4000 दखल-दिहानी के मामले लंबित हैं, उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते. लगातार जमीन लूटी जा रही है. रांची शहर की स्थिति क्या है आदिवासी बस्ती विलुप्त होने के कगार में है . कार्यक्रम में कांग्रेस नेता अकुण उरांव भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में आदिवासी आधिकारों को लेकर संघर्ष करने और अपनी शहादत देने वाले आंदोलनकारियों के परिजनो को सम्मानित किया गया. इस क्रम में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में आदिवासी दिवास के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया. झारखंड विकास मोर्चा की ओर से जामताड़ा में आदिवासी दिवस मनाया गया.

विश्व आदिवासी दिवस को भूल गयी झारखंड सरकार
पूरी दुनिया में आज का दिन विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है. लेकिन, झारखंड में आदिवासी दिवस को भुला दिया गया. संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा मुकर्रर 9 अगस्त की तारीख भारत भी हस्ताक्षरी के रूप में है. जान लें कि आदिवासी दिवस पर संयुक्त राष्ट्र संघ की थीम इस साल आदिवासी भाषाओं को बचाने को लेकर है. दुनिया में 5000 हजार से आधिक भाषाएं हैं, जिसमें हर दूसरे सप्ताह एक भाषा विलुप्त हो जा रही है. झारखंड में आदिवासी भाषाएं सिमटती जा रही है. राज्य में निवास करने वाली आठ आदिम जनजातियों की भाषा आज विलुप्त होने के कगार पर है.

संविधान प्रदत देश में कई कानून और अधिकार आदिवासी समाज को मिले हैं. झारखंड की कुल जंनसख्या का बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदाय का है. ऐसे में राज्य गठन के बाद राज्य में जो भी सरकार बनी, सभी ने आदिवासी दिवस को महत्व दिया था. 2017 में में वर्तमान बहुमत वाली सरकार ने कल्याण विभाग की ओर से जारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री का संदेश प्रकाशित किया गया था . इसके बाद राज्य सरकार ने 2018 और 19 में विश्व आदिवासी दिवस को भुला दिया. सरकार की ओर से अखबारों में शुभकामनाएं प्रकाशित नहीं की गयी. न ही आदिवासी समाज के लिए किसी तरह की घोषणा सरकार के द्वारा की गयी है. शायद सरकार यह मान चुकी है कि अब आदिवासी समाज पूरी तरह सत्ताधारी दल के साथ नहीं है.
आदिवासी दिवस पर सरकार की ओर से शुभकामनाएं न देने के सवाल पर युवा छात्र नेता अजय टोप्पो कहते हैं कि राज्य सरकार के द्वारा जानबूझकर कर आदिवासी दिवस को भुलाने की कोशिश की गयी है. ऐसे में आदिवासी अब खुद सोचे कि राज्य में उनकी स्थिति क्या है.
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आदिवासियत की जीवन शैली से पूरा विश्व प्रेरणा ले रहा है


