
Ranchi : राज्य का उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग स्टूडेंट्स को तकनीकी शिक्षा के स्नातक कोर्स से लेकर रिसर्च वर्क तक के लिए फेलोशिप देता है. यह सुविधा मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत दी जाती है. इसे साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुरू किया था. लेकिन अब इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. न तो विभाग इस पर ध्यान दे रहा है और ही स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी है.
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वेबसाइट ही खोलती है महत्वाकांक्षी योजना की पोल
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के की वेबसाइट को खंगालें तो जो आंकड़े सामने आते हैं वह इस महत्वाकांक्षी योजना की पोल खोलते हैं. वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े बताते हैं कि बीते दो साल में विभाग की ओर से कोई स्कॉलरशिप नहीं दी गयी है.
तीन कैटेगरी में मिलता स्कॉलरशिप का लाभ
विभाग की ओर से इस ‘चीफ मिनिस्टर फेलोशिप योजना’ के तहत तीन कैटेगरी में फेलोशिप मिलती है. पहला स्नातक स्तर पर तकनीकी पाठ्यक्रम में नामांकन ले चुके छात्रों के लिए स्कॉलरशिप योजना है. दूसरा राज्य के विश्वविद्यालयों से पीजी कर चुके छात्रों को पीएचडी के साथ-साथ शोध कार्य के लिए फेलोशिप मिलती है. फेलोशिप की तीसरी श्रेणी में वैसे स्टूडेंट्स आते हैं जिनका रिसर्च वर्क विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में से किसी एक में चुना गया हो.
पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को मिलते हैं 15 हजार रुपये प्रतिमाह
अब इस योजना के तहत मिलने वाली राशि की बात करें तो तकनीकी संस्थानों में स्नातक करने और राज्य के विवि से पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है. जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष 100 विवि में शोधवर्क चयनित उम्मीदवारों को एक लाख रुपये मिलते हैं. यह राशि जिस एकेडमिक इयर में स्टूडेंट्स सेलेक्ट हुए हैं, उससे अगले तीन साल तक मिलती है.
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अब इस योजना के स्टेटस की बात करें तो https://jhcmfellowship.nic.in/about के मुताबिक कुल 87 एप्लीकेशन इसके लिए आये. 54 एप्लीकेशन यूजी/पीजी कोर्स के लिए हैं. वहीं 33 एप्लीकेशन रिसर्च प्रोग्राम कोर्स के लिए हैं. अब तक इन्हीं आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को फैलोशिप दी गयी है.
झारखंड के रहनेवालों को ही मिलता है लाभ
स्नातक स्तर पर वैसे स्टूडेंट्स जो 23 आइआइटी, 19 आइआइएम, 29 एनआइटी, 17 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी समेत देश के 163 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में पढ़ते हैं, उन्हें यह स्कॉलरशिप मिलती है. योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिलता है जिनके अभिभावक आयकर दाता नहीं हैं और वे झारखंड के रहने वाले हैं.
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