
Pravin kumar
Ranchi: कोरोना महामारी से विश्व की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गयी है. हालात ये हैं कि बेहिसाब लोग बेरोजगार हो गये हैं. फैक्टियों में काम बंद होने से प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. उनके सामने अब भुखमरी के हालात हैं. वहीं इस संकट की घड़ी में इस संकट की मजदूरों की सहायता के लिए झारखंड सरकार कई योजनाओ पर काम कर रही है. जिसके प्रथम चरण में प्रवासी मजदूरों को झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के द्वारा कोविड-19 हेल्पलाइन शुरू किया गया.
जिसमें फिया फाउंडेशन राज्य सरकार को सहयोग कर रही है. कोविड-19 हेल्पलाइन के संग्रह किये गये आकड़ों को लेकर प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए राज्य के वरीय अधिकारीयों को नियुक्त किया गया. साथ ही राज्य सरकार ने मजदूरों को अर्थिक मदद भी पहुंचाने का काम किया. जिसमें 1 लाख 99 हजार 608 प्रवासी मजदूरों के खाते में राशि भेजी गयी.
इसे भी पढ़ें – दूसरे राज्यों से धनबाद आने वाले मजदूर बॉडी टेंपरेचर कम करने के लिए कालपोल दवा का कर रहे हैं इस्तेमाल
हेमंत सरकार के समक्ष क्या है चुनौती प्रवासी मजदूरों को लेकर
प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं. मजदूरों का सब्र टूटता जा रहा है. जिन अधिकारीयों को प्रवासी मजदूरों के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है. उन अधिकारीयों के द्वारा मजदूरों को राहत पहुंचाने में विलंब होने के भी कई मामले सामने आये हैं. जो राज्य सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. राज्य सरकार ने घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों को रखने के लिए पंचायत स्तर पर 10 बेड का क्वारेंटाइन सेंटर बनाया है. साथ ही कई अन्य स्थानों पर भी व्यवस्था की गयी है. लेकिन ये पर्याप्त नहीं है.
भूख का सवाल
राज्य में लॉकडाउन और काम बंद होने के वजह से पहले से ही राज्य का बड़ी आबादी के समक्ष भोजन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. जिसका उदाहरण दाल- भात केन्द्र और मुख्यमंत्री दीदी किचेन में देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है.
दीदी किचन में पिछले 15 दिनों में 4 लाख से 6 लाख तक खाने वालों का आंकड़ा पहुंच चुका है. 21 अप्रैल को दीदी किचन से 4,86130 लोगों ने लाभ उठाया. इसी तरह 22 अप्रैल को 4,91856 लोगों को इसका लाभ मिला.
वहीं 1 मई को 5,96498, 2 मई को 600477 और 3 मई को 6,23486 लोग अपनी भूख मिटाने के लिए इन केंद्रों पर पहुंचे. लेकिन दिन बीतने के साथ ही भोजन केंद्रो पर खाने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. क्योंकि बाहर से प्रवासी मजदूर आ रहे हैं और ये सभी इन केंद्रों पर पहुंच रहे हैं. जो हेमंत सरकार के लिए एक चुनौती है.
राशन कार्ड के लिए प्रतीक्षा सूची के आंकडे़
राज्य में रघुवर सरकार ने 11 लाख 64 हजार राशन कार्ड रद्द कर दिये थे. जिसमें कई जरूरतंमदों का कार्ड भी रद्द हुआ था और कथित रूप से भूख से मौत के मामले भी सामने आये थे. अभी भी राशन कार्ड के लिए आवेदन कर चुके लोगों की संख्या 7 लाख 29 हजार के करीब है, ऐसे आवेदकों को जांच के बाद राशन कार्ड मुहैया कराने की जरूरत है.
इसे भी पढ़ें – #Ranchi: 30 बरसों से पेयजल संकट से जूझ रही लालखटंगा पंचायत, मुखिया ने मंत्री मिथिलेश ठाकुर से लगायी राहत की गुहार
रोजगार एंव नियोजन
प्रवासी मजदूरों को झारखंड लौटने के बाद कई प्रवासी मजदूर शायद ही अब फिर से दूसरे राज्य में काम करने के लिए जायें. सरकारी आकड़ों के मुताबिक, 9 लाख 95 हजार 70 मरीज ऐसे हैं जो राज्य से बाहर रोजगार के लिए दूसरे राज्य गये थे. अब इनके लिए भी रोजगार सरकार को व्यवस्था करना भी जिम्मेवारी है.
प्रवासी मजदूर को सकुशल वापस लाना
सरायकेला के एक मजदूर रवि मुंडा की मौत छत्तीसगढ़ के विलासपुर में पैदल घर लौटने के क्रम में हो गयी थी. साथ ही ऐसी सूचना है कि अभी भी कई मजदूर पैदल चलकर घर लौट रहे हैं. तो इन्हें भी त्तकाल मदद पहुंचाये जाने की जरूरत है. पांच लाख से अधिक प्रवासी मजदूर राज्य लौटने के लिए पंजीयन करा चुके हैं, अब उन्हें भी सकुशल वापस लाना एक बड़ी चुनौती हो गयी है. राज्य सरकार के समक्ष प्रवासी मजदूरों एवं राज्यवासियों को कोरोना काल में मदद के लिए कई उपाय आर्थिक क्षेत्र में भी करने होंगे. जिससे सरकार को भी राजस्व मिल सके.
इसे भी पढ़ें – #JharkhandCongress: नये प्रदेश अध्यक्ष की चर्चा जोरों पर, गुटबाजी के बढ़ सकते हैं आसार!




