
Ranchi : राज्य में सूचना आयोग बदहाल है. पिछले साल (2020) में आयोग से प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी रिटायर हो गये थे. उनके बाद से एक भी आयुक्त आयोग में नहीं हैं. आयुक्तों के अभाव में आरटीआई कानून के साथ खिलवाड़ के मामले भी खूब आ रहे हैं. आयोग में लंबित केसों की संख्या भी बढ़ रही है. हालांकि अभी केस रजिस्टर्ड नहीं किये जा रहे. पिछले एक साल में आयोग के पास 7 हजार से अधिक केस पहुंच चुके हैं. इसके अलावा पूर्व से 7 हजार केस सुनवाई के लिए लंबित पड़े हैं. अब भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच ने 12 अक्टूबर को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों में सड़कों पर उतरने का फैसला किया है. कोविड-19 के नियमों का पालन करते धरना देंगे. जिला उपायुक्तों के माध्यम से राज्यपाल से फरियाद करेंगे कि वे सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के मसले पर हस्तक्षेप करें.
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आरटीआई के बगैर पारदर्शिता की बात बेईमानीः रविकांत
मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रविकांत पासवान ने मीडिया को जारी बयान में कहा है कि मंच की ओर से राज्य के मुख्य सचिव को धरना कार्यक्रम और अन्य मसले पर पत्र लिखा गया है. नागरिक समाज को आरटीआई के जरिये ही सरकारी योजनाओं, प्रयासों की जमीनी हकीकत का पता चलता है. पर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं किये जाने से राज्य में आरटीआई के साथ खिलवाड़ हो रहा है. 12 अक्टूबर, 2005 को देश में आरटीआई कानून लागू हुआ था. 16 बरसों बाद जहां देश में दूसरी जगहों पर सूचना आयोग अपना अहम भूमिका निभा रहा है, वहीं झारखंड में यहां सन्नाटा पसरा है जो चिंतनीय है. उन्होंने राज्य के सभी आरटीआई कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं से 12 अक्टूबर के कार्यक्रम में भाग लेने की भी अपील की.
कहां अटका है मसला
इसी साल फरवरी-मार्च में विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने सदन में कहा था एक मुख्य सूचना आय़ुक्त और 5 सूचना आय़ुक्तों की नियुक्ति के लिए समिति गठित है. इसकी बैठक करके आगे की कार्रवाई की जानी है. सरकार के इस जवाब के विपरीत स्थिति यह है कि नेता प्रतिपक्ष को समिति में शामिल किये बगैर आयुक्तों के लिए गठित चयन समिति का कोरम पूरा नहीं होता. नेता प्रतिपक्ष का मामला अब भी विधानसभा स्पीकर के पास लंबित पड़ा हुआ है.
354 से अधिक आवेदन
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के मुताबिक मुख्य सूचना आय़ुक्त के लिए 63 कैंडिडेट्स के आवेदन शॉर्टलिस्ट किये जा चुके हैं. 5 सूचना आय़ुक्तों के लिए 354 आवेदन प्राप्त हुए थे. यानी कुल 6 सूचना आयुक्तों के पदों के विरुद्ध 417 कैंडिडेट रेस में हैं. विभाग के अनुसार आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति अनुशंसा करेगी.कार्मिक के अनुसार राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति के लिए 4 बार विज्ञापन जारी हुए थे.
वर्ष 2017 (11-03-2017) में जारी निज्ञापन के अनुसार आयुक्त के एकल पद के लिए विज्ञापन जारी हुआ था. इसके बाद 2019 (27-02-2019, विज्ञापन सं-01/2019) में इसे जारी किया गया. इसके बाद 21-10-2019 को फिर से यह जारी हुआ. 14-11-2019 को एक विज्ञप्ति जारी कर पुराने सभी विज्ञापनों को रद्द कर दिया गया था. अंततः वर्ष 2020 में (03-01-2020) नये सिरे से एक मुख्य सूचना आयुक्त और 5 सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन जारी किया गया था.




