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सावधान! तकनीकी रूप से छेड़-छाड़ कर न्यूज विंग के बैनर तले चलायी जा रही है फेक न्यूज

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Ranchi : लोकसभा चुनाव के वक्त कई तरह की फेक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हैं. मतदाता को प्रभावित करने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाना इस दौर का नायाब तरीका माना जाता है. जरूरत है, ऐसी खबरों से बचने की.

न्यूज विंग के भी बैनर का इस्तेमाल कुछ असमाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं. झारखंड के कई व्हाट्सएप ग्रुप में एक खबर वायरल है. वायरल खबर आज की नहीं बल्कि 2014 की है. 21 मार्च 2014 को न्यूज विंग में एक खबर छपी थी.

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खबर सुदेश महतो के रांची से लोकसभा चुनाव लड़ने से संबंधित थी. सुदेश महतो ने रांची लोकसभा से चुनाव लड़ा भी था. लेकिन आज यह खबर फिर से वायरल की जा रही है. हालांकि खबर पुरानी है लेकिन इस न्यूज को इस वक्त वायरल करने का मकसद बस और बस लोगों को कन्फ्यूज करना है.

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क्या है सरकार की गाइडलाइन

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि किसी तरह के फेक न्यूज के बारे में शिकायत की जांच की जाएगी. मंत्रालय के मुताबिक के अब फेक न्यूज के बारे में किसी तरह की शिकायत मिलने पर यदि वह प्रिंट मीडिया का हुआ तो उसे प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हुआ तो न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) को भेजा जाएगा. ये संस्थाएं यह तय करेंगी कि न्यूज फेक है या नहीं.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी शिकायत मिलने पर किसी पत्रकार को ज्यादा परेशानी न हो, शिकायत की प्रक्रिया को दोनों एजेंसियों के द्वारा 15 दिन के भीतर निपटाने की व्यवस्था होगी. इस बारे में खुद सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट पर एक प्रतिक्रिया में कहा है कि यह बताना उचित होगा कि फेक न्यूज के मामले पीसीआई और एनबीए के द्वारा तय किए जाएंगे, दोनों एजेंसियां भारत सरकार के द्वारा रेगुलेट या ऑपरेट नहीं की जाती हैं.

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