
Ranchi: कांग्रेस अनुशासन कमिटी के द्वारा निष्कासित किये जाने की अनुशंसा का आलोक दुबे, राजेश गुप्ता, लाल किशोर नाथ शाहदेव ने विरोध जताया है. स्टेट गेस्ट हाउस, मोरहाबादी में प्रेस वार्ता कर तीनों ने प्रदेश कांग्रेस को सवालों के घेरे में खड़ा किया. आलोक दुबे ने तो कहा कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का लगाव भाजपा से है. उनके नेतृत्व में 2024 का चुनाव नहीं लड़ा जा सकता. हमारे खून में कांग्रेस की विचारधारा है. 32 वर्षों से कांग्रेस में वे काम कर रहे है. इस दौरान वे कई बार जेल गए. आधी रात को घर से पुलिस उठाती थी. ऐसे में हम किसी से डरने वाले नहीं हैं. पार्टी से निकालना है तो निकाल दें. प्रदेश अध्यक्ष किसी व्यक्तिगत कारण से पार्टी को नीचा दिखाने में लगे हैं. प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर हमें संगठन से निष्कासित करने की अनुसंशा की गई है. आलोक ने कहा कि अनुशासन कमिटी के द्वारा प्रेस के सामने आकर बताया गया कि पार्टी से निष्कासित किया जा रहा है. कमिटी बताए कि आखिर हमने गलती क्या की है. संगठन को मजबूत करने के लिए आवाज़ ही तो उठायी थी. पार्टी सभी की है पर हमारा भविष्य गैर कांग्रेसी तय कर रहा है. यह सही नहीं है. हमारे संगठन में आकर बाहरी लोग पार्टी को चला रहे हैं. ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.
पार्टी को टूटने नहीं देंगे
आलोक दुबे ने कहा कि राजेश ठाकुर के पास संगठन चलाने का अनुभव नहीं है. प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस ने जब जिला कमिटी की सूची बनाई तो उसमें एक भी मुस्लिम नहीं था.यह कोई छोटी गलती नहीं है. हम भाजपा को हराने चले हैं लेकिन कांग्रेस के कोर वोटर को हटाकर ऐसा नहीं कर सकते हैं. ब्राह्मण और भूमिहार को जिले में जगह दी गयी. इसके बावजूद मुस्लिम, दलित, महिला और यादव को किनारे कर दिया गया. बोकारो में जिला अध्यक्ष का चुनाव होता है तो जो चुनाव में शामिल नहीं हुआ, उसे अध्यक्ष बना दिया गया. अगर कांग्रेस को बचाना है तो बिना आदिवासी चेहरे के ऐसा संभव नहीं. आलोक ने कहा कि हम सब किसी कार्रवाई से नहीं डरने वाले हैं. जिसे जो कार्रवाई करना है करे लेकिन पार्टी को टूटने नहीं देंगे.
कांग्रेस नेता किशोर लाल ने कहा कि अनुशासन समिति के द्वारा हम पांच लोगों को निष्कासित करने की अनुशंसा की गई है. इससे पहले भी 24 दिसंबर को ऐसा ही किया गया था. प्रदेश कांग्रेस की ओर से जो जिला अध्यक्ष कमिटी की घोषणा की गयी थी, उसमें महिला अल्पसंख्यक को दूर रखा गया था. इस मामले का विरोध राज्य भर में हुआ था. कई जगहों पर पुतला भी दहन किया गया था. बवाल बढ़ता देख तीन बार सूची में बदलाव किया गया. शाहदेव ने कहा कि 19 दिसंबर को हमलोगों ने एक बैठक कर प्रदेश अध्यक्ष किसी आदिवासी को बनाने की मांग की थी. जब हम जनता के बीच 2019 में गए थे तो उस दौरान झारखंड में कांग्रेस मजबूती के साथ उभरी थी. लेकिन वर्तमान अध्यक्ष उसे तार तार करने में लगे हैं. इस मामले को लेकर वह केंद्रीय नेतृत्व से मिलेंगे.
राजेश गुप्ता ने कहा कि जिस जिला में कांग्रेस के अध्यक्ष के चुनाव में शामिल नहीं हुए, उसे सम्मानित किया गया. हमने शुरू से NSUI से लेकर अब तक पार्टी को दिया है. हम संगठन को टूटता नहीं देख सकते हैं. पिछले चुनाव में आदिवासी नेता के नेतृत्व में हमने सबसे मजबूती के साथ चुनाव लड़ा और सीट जीता.लेकिन वर्तमान अध्यक्ष इससे हट कर काम कर रहे है. हमारे खून में कांग्रेस है. हम किसी भी हाल में पार्टी को कमजोर नहीं होने देंगे. जो वर्षों तक कांग्रेस में बिना किसी लोभ के काम किया, वह आज बेगाना हो गया. जिसने काम नहीं किया, वह पार्टी के शीर्ष में बैठने का हक़दार नहीं है.
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