
Ranchi: भोजनावकाश के बाद गृह, आपदा प्रबंधन, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के अनुदान मांग पर चर्चा हुई. अनुदान मांग पर चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर ने कहा कि सदन में आजकल शेरो शायरी बहुत आ रहा है. हम चाहते हैं कि सदन के बाद एक मुशायरा भी करा लिया जाय. सदन में यह देखा गया कि सिर्फ आरोप प्रत्यारोप हुआ. मेरा मानना है कि सदन में विषयों पर सकारात्मक चर्चा होनी चाहिए. 15 दिनों में देखा कि जनता के सवाल गौण रहे. हमारी सरकार के तीन साल के कार्यकाल को देखिए, जनता से जो वादा किया उसपर काम किया. गरीबों के लिए योजना लाया. गांव में लोगों को न्याय मिले इसके लिए सरकार आपके द्वार कार्यक्रम की शुरआत की. तीन वर्षों में एक नहीं अनेक योजनाएं चलायी. हमारी सरकार जनता के बीच रहकर काम किया. सेविका और सहायिका के मामले में हमारी सरकार ने मानदेय दिया. 27 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी को, 1932 खतियान और सरना कोड को सदन से पारित कराया लेकिन विपक्ष ने कभी यह कोशिश नहीं किया कि केंद्र सरकार से इसपर सहमति ली जाय. प्रधानमंत्री आवास के लिए हमारी सरकार ने घोषणा किया था कि और 50 हजार रुपये देंगे लेकिन केंद्र से चालू वित्तीय वर्ष में अलॉट नहीं हुआ. 2022-23 में सरकार ने कैबिनेट से 568 प्रस्ताव पारित किया है जो जनहित में है. हमारी सरकार संवेदनशील है और जनता की भावनाओं के अनुरूप नीति बना रही है. विधि व्यवस्था के मामले में उन्होनें कहा कि राज्य के 300 पुलिस थाने में महिला डेस्क स्टाफ की व्यवस्था की है. साइबर क्राइम के रोकथाम के लिए भी सरकार तेजी से काम कर रही है.
राज्य में चल रहा है संपोषित भ्रष्टाचार : सीपी सिंह
अनुदान मांग पर कटौती प्रस्ताव लाते हुए भाजपा विधायक सीपी सिंह ने कहा कि राज्य में संपोषित भ्रष्टाचार चल रहा है. आरोप लगाया कि भवन निर्माण विभाग में 46 प्रतिशत घूस चल रहा है. कहा कि सिर्फ भवन निर्माण में ही नहीं, सभी विभागों में भ्रष्टाचार कायम है. गरीब आदमी का एफआईआर नहीं लिया जाता है. भाजपा विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि तीन वर्षों में सरकार ने मात्र 357 लोगों को नौकरी दी है. भ्रष्टाचार के आरोप में अधिकारी जेल जा रहे हैं और मुख्यमंत्री वैसे अधिकारी को बचाने में लगे हुए हैं. कहा की भ्रष्टाचार का आलम यह है कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का भी इसकी गिरफ्त में हैं. राज्य के युवा दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. मुख्यमंत्री से जब नियोजन नीति पर सवाल किया जाता है तो वे झूठ बोलकर निकल जाते हैं.
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