न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#MeToo अभियान पर बोले बीजेपी सांसद- भारत में ये एक गलत प्रथा

कैंपेन जरुरी लेकिन दस साल बाद आरोप कितने प्रासंगिक

122

New Delhi: #MeToo कैंपेन के जरिए यौन शोषण की शिकार हुई महिलाएं जहां अपना गुस्सा और दर्द जाहिर कर रही हैं. वही कुछ लोग इसके पक्ष में हैं, तो कुछ विरोध कर रहे हैं. इस कैंपेन के विरुद्ध बीजेपी सांसद उदित राज ने भी नाराजगी जाहिर की है. भाजपा सांसद उदित राज ने मंगलवार को भारत में मीटू अभियान को गलत प्रथा करार दिया और सवाल उठाया कि 10 सालों बाद किसी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाना कितना प्रासंगिक है.

इसे भी पढ़ेंः#Metoo का असरः MAMI फिल्म महोत्सव से बाहर हुई एआईबी, रजत कपूर की फिल्में

कैंपेन जरुरी, लेकिन दस साल बाद आरोप कितने प्रासंगिक

देश में मीटू अभियान जोर पकड़ता दिख रहा है और एक के बाद एक कई महिलाएं मनोरंजन और मीडिया जगत में अपने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा कर रही हैं. बीजेपी सांसद ने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘मीटू कैम्पेन जरूरी है लेकिन किसी व्यक्ति पर 10 साल बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है ? इतने सालों बाद ऐसे मामले की सत्यता की जांच कैसे हो सकेगा?’’

इसे भी पढ़ें – आलोक नाथ पर विन्‍ता नंदा ने लगाया यौन शोषण का आरोप, सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा…

कैंपेन का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए !

भाजपा सांसद ने कहा कि जिस व्यक्ति पर झूठा आरोप लगा दिया जाएगा, उसकी छवि को कितना बड़ा नुकसान होगा. ये सोचने वाली बात है. गलत प्रथा की शुरुआत है. उत्तर पश्चिम दिल्ली संसदीय क्षेत्र के सांसद ने कहा कि मीटू अभियान का इस्तेमाल ब्लैकमेल करने के लिये किया जा रहा है.

इसे भी पढ़ेंःसवालः आखिर पाकुड़ में डीसी के खिलाफ हो रहे हंगामे पर सरकार क्यों नहीं ले रही संज्ञान

उन्होंने कहा कि यह कैसे संभव है कि कोई लिव-इन रिलेशन में रहने वाली लड़की अपने पार्टनर पर कभी भी रेप का आरोप लगाकर उस व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करा दे और वो व्यक्ति जेल चला जाए. इस तरह की घटना आए दिन किसी न किसी के साथ हो रही हैं. क्या यह ब्लैकमेलिंग के लिये नहीं इस्तेमाल हो रहा?.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने किया था समर्थन

एक ओर बीजेपी सांसद उदित राज इस कैंपेन के खिलाफ नजर आ रहे हैं. वही केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इस कैंपेन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि सेक्सुअल हरेसमेंट के मामले चाहे वह कितने भी साल पुराने क्यों न हो FIR दर्ज होनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें – 8 अरब की वन भूमि निजी और सार्वजनिक कंपनियों के हवाले, फिर भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं 

उल्लेखनीय है कि यह अभियान तब शुरू हुआ जब अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाया कि अभिनेता नाना पाटेकर ने 2008 में एक फिल्म के सेट पर उनका यौन उत्पीड़न किया. इसके बाद से कई महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से अपने उत्पीड़न के अनुभवों को साझा किया.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.


हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: