
Ranchi: प्रदेश राजनीति में बहुत जल्द दो महत्वपूर्ण चुनाव होने वाले हैं. पहला दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव, दूसरा बेरमो और दुमका का उपचुनाव. कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह के निधन के बाद बेरमो में उपचुनाव होने वाला है, तो दुमका उपचुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सीट छोड़ने से.
लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के कामों से हेमंत सरकार जहां सुर्खियां बटोर रही है. तो दूसरी तरफ प्रदेश बीजेपी राज्य सरकार पर मजदूरों, महिलाओं को धोखा देने का आऱोप लगा रही है. कांग्रेस का दावा है कि लॉकडाउन के वक्त युवा कांग्रेस ने लोगों की खूब सेवा की है. हर गरीब और मजबूर के पास पहुंचने की कोशिश हुई है.
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वहीं कांग्रेस की तरफ से विपक्षी पार्टी बीजेपी पर लॉकडाउन के वक्त सिर्फ राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा है. इन्हीं तमाम मुद्दों पर न्यूज विंग के संवाददाता Nitesh Ojha से चर्चा की युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव ने. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश.
सवाल- राजनीतिक की क्षेत्र में आने का मन कैसे बनाया.
जवाब- राजनीति कोई इंस्टीट्यूशन नहीं, जहां आप दाखिला ले. राजनीति एक सोच है. छोटी आयु में अपने पिता के कामों को उन्होंने देखा था. वे देखते थे कि कैसे उनके पिता गरीबों, वंचित लोगों की मदद को हमेशा आगे रहते थे. इन्हीं से उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा मिली.
सवाल- पूरे लॉकडाउन में आपकी और युवा कांग्रेस की भूमिका क्या थी.
जवाब- पिताजी हमेशा कहते थे कि जितने लोगों की मदद कर सको, करो. हालांकि लॉकडाउन के दौरान पिताजी अस्वस्थ हो गये थे. लेकिन उनकी प्रेरणा औऱ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी के बातों को मान उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि गरीबों, वंचितों को मदद पहुंचाने में वे हमेशा तैयार रहे. मैं गर्व से कहता हूं कि ऐसा कोई संगठन नहीं होगा, जिसने पूरे लॉकडाउन युवा कांग्रेस जैसा काम किया है.
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सवाल- राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पास आंकड़ा काफी कम है. जीत कैसे सुनिश्चित करेंगे?
जवाब- प्रयास करना सबका अधिकार है. जीत का आंकड़ा तो बीजेपी के पास भी नहीं है. सरकार बनाने के दौरान जितने विधायक ने हेमंत सरकार को समर्थन दिया था, उतने विधायक यूपीए के दो प्रत्याशियों के पक्ष में वोट देते हैं, तो जीत गठबंधन सरकार की होगी.
सवाल- बेरमो उपचुनाव में प्रत्याशी को लेकर क्या कहना है. क्या आपके परिवार से होगा कोई उम्मीदवार. वहीं दुमका उपचुनाव में युवा कांग्रेस की क्या भूमिका रहेगी ?
जवाब- .राजेंद्र सिंह का परिवार कांग्रेस के साथ हमेशा खड़ा रहा है. बेरमो उपचुनाव पर उनका जवाब यही होगा कि पार्टी तय करेगी कि प्रत्याशी कौन होगा. प्रत्याशी कोई भी हो, पूरा परिवार उसका समर्थन करेगा. वहीं दुमका उपचुनाव में गठबंधन दल के नेतृत्व के आदेश के बाद युवा टीम डोर-टू-डोर कार्यक्रम चलाएगी. सरकार की उपलब्धियों को जनता को बताएगी.
सवाल- जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर बीजेपी प्रवासी मजदूरों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है?
जवाब- पूरे देश ने देखा है कि कैसे झारखंड के यूपीए सरकार ने लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को एयरलिफ्ट कराने का काम किया है. वो भी तब, जब कोरोना महामारी में राज्य सरकार आर्थिक और सभी तरह की सहायता के लिए केंद्र पर निर्भर थी. जब प्रवासी मजदूरों को गुजरात में पीटा जा रहा था.
कई राज्यों से मजदूर पैदल चल झारखंड लौट रहे थे, तब बीजेपी वालों को मजदूरों का दर्द नहीं दिखा. दरअसल कोरोना के समय बीजेपी केवल एक मिशन पर काम करती रही. मिशन था, कैसे विपक्षी विधायकों और सांसदों को खरीदा जाए. इस काम में पीएम केयर फंड में मिली राशि भी खूब काम आयी. अगर गरीबों से बीजेपी वालों को इतना ही प्रेम है, तो आज 36 डॉलर प्रति बैरल क्रूड ऑयल का दाम है. तो फिर मोदी सरकार क्यों प्रति लीटर 74 रूपये पेट्रोल वसूल रही है.
सवाल- बीजेपी कहती है कि मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना और 1 रुपये में जमीन रजिस्ट्री जैसी योजनाओं को बंद कर हेमंत सरकार ने किसानों और महिलाओं को धोखा दिया है?
जवाब- हमने तो पिछले पांच साल में राज्य में केवल हाथी को उड़ाते देखा है. मोमेंटम झारखडं के विज्ञापन में 700 से 800 करोड़ रूपये खर्च करने वाले रघुवर सरकार में फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनाने का काम हुआ. यह सभी जानते है कि 1 रूपये में जमीन रजिस्ट्री योजना से किसी गरीब महिला को फायदा नहीं पहुंचा है. योजना से होते राजस्व को नुकसान देख यह काम सही नहीं है. मुख्यमंत्री कृषि आर्शीर्वाद योजना को बंद कर राज्य सरकार बेहतर योजना लाने वाली है.
सवाल- लाखों युवाओं के वर्तमान और भविष्य को देखते हुए युवा कांग्रेस की हेमंत सरकार से क्या उम्मीद है ?
जवाब- कोरोना संकट में भी मनेरगा से हेमंत सरकार ग्रामीण इलाकों में युवाओं को रोजगार दे रही है. पारा शिक्षक को नियमित करने का काम हो रहा है. सरकार से उनकी उम्मीद यही है कि हर साल कम से कम एक जेपीएससी की परीक्षा आयोजित हो. हर साल रिक्त हो रहे पदों को भरा जाए. ह्यूमन रिसोर्स वाले उद्योगों को राज्य में लगाया जाये, यहीं सोच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की थी, ताकि युवा पीढ़ी मजबूत हो सके.
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