
Jamshedpur : राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और विधायक सह पूर्व मंत्री सरयू राय के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमा नहीं है. इस बीच मंत्री बन्ना गुप्ता के समर्थकों ने जगह-जगह सरयू राय के पुतला दहन कार्यक्रम की शुरुआत की है. उसे देखते हुए विधायक सरयू राय के पार्टी भारतीय जनमोर्चा (भाजमो) के नेताओं ने भी स्वास्थ्य मंत्री पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. इस कड़ी में भाजमो जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव एवं जिला मंत्री विकास गुप्ता एवं जिला कोषाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने संयुक्त रुप से एक बयान जारी किया है. उसमें भाजमो नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री को दोहरे चरित्र का बताते हुए उन्हें अवसरवादी और मौसमी नेता करार दिया है. इन नेताओं का कहना है कि बन्ना गुप्ता जब जैसा, तब तैसा और जहां जैसा-वहां वैसा की नीति पर चलते हैं.
मंत्री के रिश्तेदारों पर लगाया अवैध निर्माण का आरोप
भाजमो नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री के रिश्तेदारों और नजदीकियों पर जमशेदपुर और मानगो में अवैध निर्माण का भी आरोप लगाया है. साथ ही उनका कहना है कि इन्होंने कई अन्य बिल्डरों को भी प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. भाजमो नेताओं ने सवाल किया है कि बिल्डर हित की बड़ी -बड़ी बातें करनेवाले स्वास्थ्य मंत्री को बताना चाहिए कि क्या वे अपने रिश्तेदारों के अवैध निर्माण पर कार्रवाई कराने के लिए तैयार हैं या प्रशासन पर धौंस जमाकर अपने नजदीकियों और रिश्तेदारों के अवैध निर्माणों को संरक्षण देंगे.
खतियान और भोजपुरी मामले को लेकर भी उठाये सवाल
इन नेताओं ने 1932 के खतियान और भोजपुरी के मामले को लेकर भी मंत्री के रवैये पर सवाल उठाये हैं. उन्होंने कहा है कि बन्ना गुप्ता जिस मंत्रिपरिषद में मंत्री हैं उसी मंत्रिमंडल की बैठक में भोजपुरी, मगही, मैथिली को राज्य की भाषा सूची से हटाने का निर्णय हुआ. मंत्रिपरिषद में इन भाषाओं का गला रेता जा रहा था तब कुर्सी जाने के डर उनके मुंह से कुछ नहीं निकला. उसके बाद इन मामलों में जनता के बीच उन्होंने बेमतलब अपनी शेखी बघारना शुरू कर दिया. इससे बड़ा ढकोसला कुछ और नहीं हो सकता. भाजमो नेताओं ने मंत्री बन्ना गुप्ता से यह बताने को कहा है कि इस मुद्दे में मंत्रिमंडल की बैठक में आखिरकार उन्होंने क्या कहा? यदि इन्होंने कैबिनेट के इस निर्णय पर लिखित असहमति व्यक्त की है तो वह भी बताएं और इसे सार्वजनिक करें. वे यह भी बताएं कि जब विधानसभा में यह मामला प्रश्न के माध्यम से उठा था तब उन्होंने चुप्पी क्यों साधे रखी थी. भाजमो नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे में विधानसभा में चुप्पी और मंत्रिपरिषद की बैठक में चुप्पी और बाहर जनता के बीच बयानबहादुर बनना उनके दोहरे चरित्र को ही प्रदर्शित करता है. उन्होंने कहा कि जनता मंत्री के इस दोहरे चरित्र को समझ चुकी है. जनता को अपने नाटक से बरगलाने की उनकी शैली अब नहीं चलेगी. वे जब भ्रष्टाचार के आरोप में फंसने जा रहे हैं तो जाति की ओट में अपना दामन बचाना चाहते हैं. हालांकि उनका यह प्रयास सफल होता नहीं दिख रहा है.




