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जनता के पैसों की बर्बादी का उदाहरण है बोकारो सिटी पार्क में बना पूर्वी भारत का सबसे बड़ा म्यूजिकल फाउंटेन

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Divy Khare

Bokaro: अगर जनता के पैसे की बर्बादी देखनी है तो बोकारो के सिटी पार्क में नौ साल से बंद पड़े पूर्वी भारत के सबसे बड़े और हाईटेक म्यूजिकल फाउंटेन को देखने अवश्य जाइए.

बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा 1.61 करोड़ के लागत से बनाए गया यह म्यूजिकल फाउंटेन उद्घाटन के आठ महीने बाद से ही बंद पड़ा हुआ है. और इस फाउंटेन के बंद होने का कारण जानकर आप बीएसएल को कोसे बिना रह नहीं पाएंगे.

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बीएसएल प्रबंधन ने सिर्फ इसे इसलिए बंद रखा है क्योंकि इसका रखरखाव अनुबंध का नवीकरण नहीं हो पाया है. बीएसएल जैसी कंपनी की अजीबोगरीब लाचारी देखिए इस म्यूजिकल फाउंटेन की देखभाल और मेंटेनेंस के लिए इसके अधिकारियों को 9 साल से कोई नहीं मिल पा रहा है.

दो बार हुआ था उद्घाटन

इस म्यूजिकल फाउंटेन के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके बनाने का क्रेडिट लेने के लिए इसका दो-दो बार उद्घाटन किया गया. दो पूर्व एमडी वी के श्रीवास्तव और एसएस मोहंती ने क्रेडिट लेने के लिए नौ महीने के अंतराल पर दो बार इसका उद्घाटन किया था.

बोकारो सिटी पार्क में आर्कषण का केंद्र था म्यूजिकल फाउंटेन

दोनों उद्घाटन में काफी पैसे खर्च किए गए थे. दरअसल बीएसएल एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है, इसलिए यह खर्च किये गये पैसे भी जनता के ही थे. फाउंटेन का पहला उद्घाटन 29 जनवरी, 2011 में किया गया था. लेकिन इसके ठीक नौ महीने बाद 23 अक्टूबर, 2011 को दोबारा उद्घाटन किया गया. और इसके बाद ही इसे जनता के लिए खोला गया.

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महज आठ महीनों में बंद हो गया म्यूजिकल फाउंटेन

दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस शानदार म्यूजिकल-लाइट शो का मजा यहां की जनता सिर्फ जून, 2012 तक ही ले पायी. आठ महीनों तक सुचारू रूप से संचालित होने के बाद बीएसएल प्रबंधन ने बिना कोई घोषणा के इसे बंद कर दिया. जो आज तक बंद पड़ा हुआ है.

अब आलम यह है कि अधिकतर लोग जो बोकारो के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट सिटी पार्क में घूमने जाते हैं, इस बंद पड़े इस म्यूजिकल फाउंटेन को देखकर बीएसएल को कोसे बिना रह नहीं पाते है. म्यूजिकल फाउंटेन का बंद पड़ा रहना यहां की जनता के लिए कोई रहस्य से कम नहीं है. इसको लेकर जितने मुंह उतनी तरह की बातें होती हैं.

पांच रुपये था टिकट का दाम, शाम को म्यूजिकल फाउंटेन शो रहता था हाउसफुल

दिनेश अग्रवाल, जो अपने परिवार के साथ सिटी पार्क घूमने गए थे, बंद पड़े म्यूजिकल फाउंटेन को देखकर दुखी हो कहा कि अगर इसे बंद ही रखना था तो बीएसएल ने जनता का इतना पैसा बर्बाद क्यों किया?

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स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की इकाई बीएसएल का यह म्यूजिकल फाउंटेन एक ड्रीम प्रोजेक्ट था. इस सतरंगी म्यूजिकल फव्वारे को नई दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर और वृंदावन गार्डन, मैसूर की तर्ज पर बनाया गया था.

इसकी ख्याति का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि बीएसएल प्रबंधन द्वारा प्रवेश शुल्क 5 रुपये रखने के बावजूद, शाम को कुछ घंटों के रंगारंग शो में 500 सीटिंग कैपेसिटी वाला इसका गलियारा हाउसफुल रहता था. यहां तक कि पड़ोसी जिले धनबाद, पुरुलिया, गिरिडीह, रामगढ़ आदि से भी लोग इसे देखने आते थे.

सिटी पार्क में एक फेरीवाला जो वहीं के एक गार्ड के साथ खड़ा था, उसने कहा की, “पार्क में आने वाले आगंतुक अक्सर हमसे पूछते हैं कि यह म्यूजिकल फाउंटेन कब चालू होगा. अपनी अनभिज्ञता बताने पर वह लोग दुखी होते हैं. जो जानते हैं की यह बीएसएल का है वह प्रबंधन को कोसते हैं. हम लोग क्या कर सकते हैं. इस म्यूजिकल फाउंटेन ने जितना बीएसएल को नाम नहीं दिया, उससे ज्यादा लोगों की गाली दिलवा रहा है.

कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल के आभाव में बंद पड़ा फाउंटेन

28 मीटर चौड़े और 8 मीटर लंबे इस म्यूजिकल फाउंटेन को नोएडा स्थित रिपल्स इंजीनियरिंग कंपनी ने बनाया था. इसमें अत्याधुनिक सिस्टम लगा हुआ है, जिसमें लगभग 200 पाइप है. इन पाइप से गुजर कर पानी संगीत की धुन में ऊपर-नीचे ताल देता है.

28 मीटर चौड़ा और 8 मीटर लंबा है म्यूजिकल फाउंटेन

संगीत की धुन पर प्रदर्शित लेजर लाइट शो इसको और खास बनाता है. इसमें एक छोटा सा गार्डन है जो इसकी सुंदरता को और भी चार चांद लगा देता है. अगर यह म्यूजिकल फाउंटेन चालू होता तो बोकारो में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र होता.

बीएसएल सूत्रों के अनुसार, कंपनी द्वारा रखरखाव अनुबंध के नवीकरण के अभाव में इसे बंद कर दिया गया था. रिपल्स इंजीनियरिंग कंपनी जिसने इसको बनाया है उसको भी इसके रखरखाव के कॉन्ट्रैक्ट के लिए टेंडर निकालकर आमंत्रित किया गया था. लेकिन उसने हामी नहीं भरी. उसके बाद री-टेंडरिंग नहीं की गई.

बीएसएल के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने कहा, “हम म्यूजिकल फाउंटेन से संबंधित मुद्दे पर अभी कुछ बोल नहीं सकते मामला काफी पुराना है. पहले के अधिकारी जो इस मामले को देखते थे अब रिटायर्ड हो गए हैं, नए अधिकारी आ गए है. इसका स्टेटस तुरंत बता पाना मुश्किल है. इसे बीएसएल का हॉर्टिकल्चर विभाग डील करता है”.

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