JamshedpurJharkhandJharkhand StoryKhas-KhabarOFFBEAT

BIG ISSUES: आग से खाक होते जंगल, तीन दिन में देश में आगजनी की 16 हजार 840 घटनाएं

Jamshedpur : झारखंड समेत देशभर में अप्रैल के शुरुआत में ही गर्मी का कहर जारी है. मौसम के बदलते मिजाज के साथ उत्तर भारत के अधिकांश राज्य लू की चपेट में हैं. झारखंड के भी कई इलाकों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है. रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा मंडराने लगा है. झारखंड जैसे वन बहुल क्षेत्र में भी आग लगने की घटनाएं हर साल होती है.

हाल ही में राजस्थान का सरिस्का 90 घंटों तक जलता रहा. इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों में जम्मू कश्मीर और हिमाचल सहित देश के कई राज्यों में हजारों हेक्टेयर का जंगल तबाह हो गया. भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार 28 मार्च से 30 मार्च के बीच देश के जंगलों में 16 हजार 840 आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से 211 बड़ी घटनाएं थीं. इनमें मध्यप्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगल शामिल हैं. देश के कई राज्यों के जंगल में आग लगने से वन्य संपदा और वन्य जीवों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है.
गर्मी में क्यों लगती है आग ?
विशेषज्ञों के अनुसार मार्च में सामान्य से अधिक तापमान बढ़ने से आगजनी की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं. जंगल में पेड़ों के सूखे पत्ते और टहनियां ईंधन का काम करते हैं. एक छोटी सी चिंगारी हीट का काम करती है. ऐसे में अगर हवा तेज चल रही हो तो एक जगह लगी आग पूरे जंगल को तबाह करने के लिए काफी होती है.

इंसानी लापरवाही आग का सबसे बड़ा कारण
इंसानों की लापरवाही के कारण जंगलों में आगजनी की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं. दरअसल, लोग जंगल में शिकार करने या उत्पाद निकालने के लिए आग लगाते हैं. जैसे कि झारखंड समेत कई प्रदेशों के जंगल में महुआ निकालने के लिए लोग झाड़ियों में आग लगाते हैं. कई बार जंगल में जाने वाले लोग बीड़ी और सिगरेट पीकर बिना बुझाए फेंक देते हैं, इससे आग लग जाती है.

आग बुझाने के लिए भी लगाई जाती है आग
आग बुझाने के लिए सबसे पहले ताप, ईंधन और ऑक्सीजन तीनों में से किसी एक को खत्म करने का प्रयास किया जाता है. पहाड़ों या घने जंगल में आग बुझाने के लिए कई बार आग का ही सहारा लिया जाता है. दरअसल, जिन जंगलों में पानी के स्त्रोत कम हो या फायर ब्रिगेड के पहुंचने में समस्या हो, वहां पारंपरिक तरीके से आग बुझाई जाती है. इसके लिए जंगल के जिस हिस्से में आग लगती है, वहां खाई खोदकर एक और आग लगाई जाती है. जैसे ही आग की लपटें खाई में लगाई आग तक पहुंचती है तो दोनों मिलकर शांत हो जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आग को जलने के लिए ऑक्सीजन चाहिए. खाई में लगाई गई दूसरी आग से वहां सीमित मात्रा में मौजूद ऑक्सीजन खत्म हो जाता है और आग बुझ जाती है.

ये भी पढ़ें-KU BIG UPDATE: दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लेना है तो करें आवेदन, व‍िश्‍वव‍िद्यालय प्रशासन लौटा देगा जमा शुल्‍क, ये रही पूरी जानकारी

Related Articles

Back to top button