
Abhishek Piyush
Jamshedpur: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर मझगांव प्रखंड में आध्यात्मिक इतिहास की कहानियों का सागर ‘बेनीसागर’ अपने आप में कई अनसुलझे रहस्यों को संजोय हुए है. कहते हैं, मझगांव प्रखंड में मौजूद ये पुरातन स्थल वो रहस्यमयी किताब है, जो शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों के अलावा पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचता है. झारखंड अलग राज्य के गठन बाद से ही यहां के इतिहास को जिंदा करने के लिए लगातार अनुसंधान हो रहा है, ताकि अपनी सभ्यता-संस्कृति को सहेजने के साथ ही इसे अगली पीढ़ी को सौंपा जा सके. इसके तहत केंद्र सरकार के भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा बेनीसागर का अध्ययन लगातर जारी है.
बेनीसागर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है. यहां कई अनसुलझे रहस्यों के संग्रह के अलावा एक भव्य धार्मिक स्थल भी है. पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर कहा जाता है कि यह स्थान 5वीं सदी से लेकर 16वीं व 17वीं शताब्दी तक लगातार बसा था. इस स्थान का नाम बेनिगर राजा बेनु के नाम पर रखा गया है जिनके द्वारा बेनीसागर के भव्य तालाब का निर्माण कराया गया था.
बेलगर को 1875 में मिली थी पहली बार मूर्तियां
बेनीसागर में बेगलर नामक व्यक्ति को सन् 1875 में पहली बार कुछ मूर्तियां मिली थी. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के हाल की खुदाई में यहां दो पंचायतन मंदिर परिसर, कुछ धर्मनिरपेक्ष के अवशेष व कुछ मूर्तियां मिली हैं. कई ग्रामीण को यहां मोहरें भी मिल चुके हैं. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसंधान के दौरान सर्वप्रथम बेनीसागर से पत्थर पर उत्कीर्ण अभिलेख मिले जो ब्राह्मिणी-संस्कृति से मेल खाते हैं. पुरालिपिक विशेषज्ञों द्वारा जब इसका अध्ययन किया गया तो बेनीसागर के 5वीं से 17वीं सदी तक इस स्थान को आध्ययात्मिक क्षेत्र के तौर पर बसनें की बात सामने आ चुकी हैं.
2003 से वैज्ञानिक लगातार कर रहे शोध व उत्खनन
बेनीसागर में विगत 2003 से लगातार वैज्ञानिकों की टीम शोध व उत्खनन का कार्य कर रही है. खुदाई के दौरान अब तक यहां कई देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्त्तियां मिल चुकी हैं, इनमें शिवलिंग, भैरव, सूर्या, गौतम बुद्ध, गणेश, अकुलिशा आदि प्रमुख है. खनन के दौरान यहां हाल में मूर्तियों के अलावा मिट्टी के पेराकोट, मुहर, मैथून शिल्प आदि भी मिले हैं, जिन्हें बेनीसागर में बने म्यूजियम में संग्रहित कर रखा गया है. म्यूजियम से कुछ दूरी पर पुरानी सभ्यता से जुड़ी इमारतों के बचे कुछ अवशेष भी देखने को मिलते हैं जिनकी वक्र बनावट को देख ऐसा प्रतीत होता है कि पुराने समय का स्नान गृह हो. इसके अलावा यहां 50 एकड़ क्षेत्र में फैला मंदिर परिसर के अवशेष भी मिले हैं.
तालाब में खिले कमल के फूल आकर्षण का केंद्र
बेनीसागर तालाब करीब 350 मीटर लंबा और 300 मीटर चौड़ा है. तालाब के चारों ओर खिले कमल के फूल इसकी शोभा बढाते हैं. स्थानीयों की मानो तो तालाब के अंदर एक चांदी से बना मंदिर मौजूद है. लेकिन आजतक इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की है. इस तालाब के कभी ना सूखने की अद्भुत विशेषता इस स्थान के रहस्यों में से पहली रहस्यमयी कहानी है जो शोधकर्ताओं के अलावा पर्यटकों के मन में भी कई सवाल पैदा करती है. तालाब के चारो तरफ पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा व्यू पाइंट बनाया जा रहा है जहां बैठकर पर्यटक प्रकृति के सौंदर्य दर्शन का लुत्फ भी प्राप्त कर सकें.
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