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पार्टी की भलाई के लिए अडवाणी बागी तेवर छोड़े, भाजपा उन्हें सम्मान दे: भागवत

नई दिल्ली: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को इशारों-इशारों में पार्टी के भले के लिए अपने ‘बागी’ तेवरों को छोड़ने की नसीहत दी, तो साथ ही बीजेपी को भी चेताया है कि आडवाणी के जाने से पार्टी तबाह हो सकती है। मंगलवार को आडवाणी की तीन किताबों के विमोचन पर भागवत ने एक कहानी के जरिए बीजेपी और आडवाणी को यह संदेश दिया। कहानी एक ऐसी महिला की थी जिसके कारण उसके सिवा पूरा गांव खुशहाल था, लेकिन उसके जाते ही वह तबाह हो जाता है।

कहानी के आखिर में भागवत ने आडवाणी से मुखातिब होते हुए कहा, ‘वहीं रहना ताकि गांव को आग न लगे। जो भी जीवन में मिले उसके हमेशा अच्छे अर्थ खोजने चाहिए।’ भागवत ने 2008 में आडवाणी की ऑटोबायॉग्रफी के विमोचन के समय भी यह कहानी सुनाई थी, लेकिन बीजेपी के अंदर आडवाणी की आज की स्थिति पर यह बिल्कुल सटीक बैठती है।

मोहन भागवत की कहानी: ‘पुराने जमाने में एक गांव की घटना है। लोग खेती करके जीवन बसर करते थे। घरों में हवन आदि होते थे। लोग सुबह हवन करते और शाम को हवन कुंड साफ करते। एक महिला हवनकुंड के सामने पापड़ सुखा रही थी। उसके मुंह में पान था। तभी वहां कुत्ता आया। वह उसे भगाने के लिए मुंह खोल नहीं सकती थी। आंगन में पापड़ ही पापड़ थे, वह खराब हो जाते। उसने हवन कुंड में थूक दिया और कुत्ते को भगा दिया। शाम को पतिदेव खेत से आए। हवनकुंड की सफाई करने लगे तो उसमें सोने को टुकड़ा मिला। उसने पत्नी से पूछा तो उसने झिझकते हुए सारी बात बता दी। उसने बताया कि हवनकुंड इतना पवित्र है कि उसने थूका और वह सोना बन गया। पति ने उसे यह बात किसी को न बताने की हिदायत दी।

एक दिन महिला ने सहेलियों को यह बात बता दी। अब हुआ यह कि उनका घर छोड़कर हर घर के हवनकुंड से सोना निकलने लगा। गांव वाले उन्हें ताना मारने लगे, तो पत्नी गांव छोड़ने की जिद करने लगी। पति नहीं माना। पत्नी की बहुत जिद के बाद एक साल बाद दोनों ने गांव छोड़ दिया। जब उन्होंने गांव के बाहर टीले से गांव को देखा तो हैरान रह गए। गांव में आग लगी थी। दंगे हो रहे थे। यह देखकर दोनों हैरान रह गए। पति ने तब पत्नी को समझाते हुए कहा कि सभी के हवनकुंड में सोना मिलता था, एक अपने हवनकुंड में यह नहीं हो रहा था। हमने गांव छोड़ा तो अब पाप गांव को खा रहा है।’

कहानी खत्म होने के बाद भागवत ने बीजेपी और वहां मौजूद आडवाणी को इस कहानी का सार भी समझा दिया। उन्होंने कहा, ‘आडवाणी जी राजनीति में हैं। कैसे रहना… वहीं रहना और उन्हीं लोगों में रहना, ताकि गांव में आग नहीं लगे।’

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