
Ranchi: 8 जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुई कथित पुलिस नक्सली-मुठभेड़ की जांच सीबीआइ के द्वारा तेज कर दी गयी है.
सीबीआइ के द्वारा किये गये पूछताछ में पुलिस अधिकारियों के बयान अलग-अलग मिले हैं. मामले की जांच कर रही सीबीआइ की टीम अब तत्कालीन पुलिस अधिकारी और वर्तमान के पुलिस अधिकारियों को आमने-सामने बैठकर पूछताछ करेगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
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अपने बयान से मुकर गया था प्राथमिकी दर्ज करनेवाला पुलिस अफसर मो. रुस्तम
बकोरिया कांड की जांच कर रही सीबीआइ टीम के सामने घटना की प्राथमिकी दर्ज करनेवाला पुलिस अफसर मो रुस्तम ही अपने बयान से पलट गया था. मो रुस्तम ने अपने बयान में दारोगा हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया था. साथ ही कहा था कि उसे सीनियर अफसरों ने लिखी हुई प्राथमिकी दी थी, जिस पर उसने सिर्फ हस्ताक्षर किया था.
उल्लेखनीय है कि घटना के बाद पुलिस अफसरों ने उस वक्त के थानेदार हरीश पाठक पर प्राथमिकी दर्ज करने का दबाव बनाया था. हरीश पाठक द्वारा फर्जी मुठभेड़ की प्राथमिकी दर्ज करने से इंकार करने पर सीनियर अफसरों ने इंस्पेक्टर मो. रुस्तम से प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
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41 लोगों का बयान लेगी सीबीआइ
जानकारी के अनुसार इस कांड में सीबीआइ मृतकों के आश्रितों सहित 41 लोगों का बयान लेगी. इस वर्ष 3 जुलाई को सीबीआई सेंट्रल फोरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन और सीबीआइ के बड़े अधिकारी पलामू पहुंचे थे और सीबीआइ की टीम ने घटना का डेमो किया था. बहुत हद तक सीबीआइ को इस कांड के अनुसंधान में सफलता हाथ लगी है.
झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने दर्ज की थी प्राथमिकी
पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र बकोरिया में आठ जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीबीआइ दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज की थी.
यह प्राथमिकी झारखंड हाई कोर्ट के 22 अक्टूबर 2018 को दिए आदेश पर दर्ज की गयी थी. इस घटना में पुलिस ने 12 लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.
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मृतकों के परिजनों ने की थी सीबीआइ जांच की मांग
मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में राज्य की जांच एजेंसी सीआइडी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ जांच की मांग की थी.
सीबीआइ ने पलामू के सदर थाना कांड संख्या 349/2015, दिनांक 09 जून 2015 के केस को टेकओवर करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी. इस केस के शिकायतकर्ता तत्कालीन सतबरवा ओपी प्रभारी मोहम्मद रुस्तम हैं.
उन्होंने लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र के उदय यादव, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के निमाकातू निवासी एजाज अहमद, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मझिगांव निवासी योगेश यादव व नौ अज्ञात मृतक और एक अज्ञात नक्सली के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. हाइकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि वादी सहित पुलिस के अधिकारी हरीश पाठक ने भी पूरी जांच पर सवाल खड़े किये थे.




