
Ranchi : राज्य सरकार ने नगर निकायों में मेयर, नगर परिषद व पंचायतों के अध्यक्ष का चुनाव गैर दलीय पद्धति से कराने का फैसला किया है. मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग चुकी है. प्रदेश भाजपा सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं दिख रही. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार को अपने निर्णय पर फिर से विचार करने को कहा है.
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बढ़ेगा बाहुबल
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात रखी है. कहा है कि नगर निगम, निकायों में प्रमुख का चुनाव गैर दलीय पद्धति से कराये जाने का फैसला ठीक नहीं.
इससे एक बार फिर स्थानीय निकायों में पैसे, बाहुबल और खरीद फ़रोख़्त की संस्कृति जन्म लेगी. पार्टी आधारित चुनाव होने से एक संगठित रूप से जनता का प्रतिनिधित्व हो पाता था, लेकिन अब ये संभव नहीं हो सकेगा.
पैसे और बाहुबल से लोग न केवल चुनाव को प्रभावित करेंगे बल्कि पार्षदों पर दबाव भी बनायेंगे. लोकतंत्र में समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवैधानिक शक्ति सुनिश्चित हो, इसके लिए हेमंत सोरेन को पहल करते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.
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डीसी ने नहीं निभायी अपनी सही भूमिका
रांची डीसी पर अवैध तरीके से हेहल अंचल में जमीन की जमाबंदी किये जाने की खबर है. मीडिया में भी रिपोर्ट आयी है. खबर के अनुसार प्रमंडलीय आयुक्त ने डीसी के द्वारा हेहल अंचल के बजरा मौजा की 7.16 एकड़ जमीन की नियम विरुद्ध जमाबंदी की.
उन्होंने जो रिपोर्ट सौंपी है, वो हैरान करनेवाली है. इसमें बताया गया है कि कैसे किसी एक पक्ष को लाभ पहुंचाते हुए न केवल जमीन की जमाबंदी करायी गयी, बल्कि पुलिस जवानों और दंडाधिकारी की नियुक्ति कर उसकी बाउंड्री करायी गयी. आयुक्त के अनुसार उक्त मामले की जांच में रांची डीसी ने सहयोग भी नहीं किया.
ऐसे मामले राज्य में जमीन माफिया और प्रशासन के गठजोड़ की कहानी बयां कर रहे हैं. मुख्यमंत्री को इस पर गंभीरता दिखाते हुए कार्रवाई करनी चाहिए.
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