Ranchi

वारंटी को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए परेशानी का सबबः 15 हजार से अधिक अबतक फरार

Ranchi: झारखंड के सभी जिले के थाने की पुलिस के लिए 15 हजार से अधिक वारंटी की गिरफ्तारी परेशानी का कारण बना हुआ है. इन फरार वारंटी में कुछ ऐसे भी हैं जो बूढ़े हो गए हैं या जिनकी मौत हो गई है. लेकिन जो जीवित हैं, उनकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है.

बता दें कि जस्टिस केपी देव की अदालत में राज्य में फरार आरोपियों के मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया था कि राज्य में 31 हजार मामलों में आरोपी फरार हैं.

झारखंड में 31 हजार फरार वारंटी में से अब तक 16 हजार से अधिक वारंटी ने या तो कोर्ट में सरेंडर कर दिया या फिर पुलिस के हाथों गिरफ्तार हुए. इसके बावजूद अभी भी झारखंड में 15 हजार से अधिक वारंटी फरार हैं.

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चुनाव को लेकर वारंटी की गिरफ्तारी में जुटी पुलिस

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर झारखंड के सभी जिलों के थाने की पुलिस लोकसभा चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से और भयमुक्त माहौल में चुनाव संपन्न कराने को लेकर जुट गई है.

इसको लेकर पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसने के साथ फरार वारंटी की भी गिरफ्तारी भी तेज कर दी है. हालांकि झारखंड में अभी 15 हजार से अधिक ऐसे वारंटी है जिनको गिरफ्तार करना पुलिस के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.

कई मामलों के वारंटी हो गए हैं बुजुर्ग

झारखंड पुलिस के विभिन्न थानों द्वारा 10 से 15 साल पहले के रिकॉर्ड के मुताबिक उन लोगों को वारंट भेजा गया है. जो किसी न किसी रूप में दागी हैं.

इनमें कई आरोपी ऐसे हैं जो उम्र के अंतिम पड़ाव पर हैं. पुलिस के समक्ष चुनौती है कि आखिर उससे समाज को क्या खतरा होगा ऐसे में पुलिस उन मामलों में एक रिपोर्ट भेजने की बात कर रही है.

बताया जा रहा है, कि जिन लोगों पर मारपीट, चुनाव में व्यवधान उत्पन्न करने, रोड जाम करने के मामले दर्ज हैं. उन मामलों में कई लोग पहले ही जमानत ले चुके हैं.

जमानत लेने की रिपोर्ट भी आरोपी द्वारा थाने में जमा नहीं की जा रही है. समय पर रिपोर्ट नहीं जाने पर अदालत से वारंट जारी कर दिया जाता है.

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गृह सचिव और डीजीपी अदालत में हुए थे उपस्थित

जस्टिस केपी देव की अदालत ने सरकार को वारंटियों को गिरफ्तार करने में तेजी लाने का निर्देश दिया था. और साथ ही 21 फरवरी को इसकी अद्यतन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.

सुनवाई के दौरान गृह सचिव और डीजीपी अदालत में उपस्थित हुए थे. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि अदालत को वैसे फरार आरोपितों का ही आंकड़ा दिया गया है, जिनके मामले पुलिस में दर्ज हैं. कोर्ट में दर्ज और शिकायतवाद के मामले इसमें शामिल नहीं हैं.

अदालत से आंकड़े लेने में समय लगेगा. इसके बाद यह संख्या बढ़ सकती है. इस पर अदालत ने डीजीपी को अदालतों के मामलों को भी शामिल करते हुए सूची तैयार कर विस्तृत रिपोर्ट 21 फरवरी तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था.

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