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पूजा सिंघल के अलावा ईडी के राडार पर हैं कई और IAS, पूर्व खान सचिव के श्रीनिवासन पर भी हैं गंभीर आरोप

  • चाईबासा डीसी रहते ओएमएम कंपनी को फायदा पहुंचाने और खान सचिव रहते बालू और लौह अयस्क उठाने की अनुमति देने पर सरयू राय और बाबूलाल मरांडी ने उठाये थे सवाल

Ranchi : खान एवं उद्योग सचिव पूजा सिंघल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी और उनके पति अभिषेक झा से जुड़े सीए सुमन कुमार सिंह के यहां से 19 करोड़ कैश की बरामदगी के बाद कई आइएएस अधिकारी ईडी के राडार पर हैं. मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक राजभवन की नजर जिन आइएएस अधिकारियों पर है, उनमें पूर्व खान सचिव और झारखंड खनिज विकास निगम के प्रबंध निदेशक के श्रीनिवासन का नाम भी शामिल है.

श्रीनिवासन के खान सचिव रहते निर्दलीय विधायक सरयू राय ने उनके खिलाफ करमपदा लौह अयस्क खदान के पट्टाधारी मेसर्स शाह ब्रदर्स को उनके पास बचे लौह-अयस्क अवशेष को बेचने की अनुमति दिये जाने पर सवाल उठाये थे.

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सरयू ने सीएम से कहा था- श्रीनिवासन को खान सचिव पद से हटायें

सरयू राय ने 27 जून 2021 को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि खान एवं भूतत्व सचिव हाइकोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या कर अनर्गल काम कर रहे हैं. उन्होंने सीएम से श्रीनिवासन को खान सचिव पद से हटाने का अनुरोध भी किया था. पत्र में सरयू राय ने कहा था कि खान सचिव श्रीनिवासन ने पद का दुरुपयोग करते हुए करमपदा लौह अयस्क खदान से आयरन ओर (लौह अयस्क) के उठाव की अनुमति दी थी.

इस संबंध में झारखंड हाइकोर्ट में दायर रिट संख्या 3013 ऑफ 2020 में कोर्ट द्वारा पारित आदेश का अनुपालन नहीं किया गया.

सरयू राय ने कहा था कि खान सचिव ने कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर नियम विरुद्ध आदेश निकाला था. सरयू राय ने विधानसभा में भी इस संबंध में सवाल पूछा था. सरयू राय ने कहा था कि खान सचिव श्रीनिवासन ने लौह अयस्क के उठाव की अनुमति देने से पहले उच्च अधिकारियों की अनुमति भी नहीं ली थी.

उन्होंने लिखा था कि, जहां तक मेरी जानकारी है शाह ब्रदर्स का खनन पट्टा सरकार ने कतिपय अनियमितताओं के कारण 2019 में रद्द कर दिया था, परंतु सरकार ने अभी तक सत्यापन नहीं किया है कि शाह ब्रदर्स के पास लौह-अयस्क की कितनी मात्रा बची है? फिर भी खान सचिव ने इन्हें बेचने का आदेश दे दिया है.

जबकि राज्य के दूसरे लौह-अयस्क पट्टाधारियों, जिनका पट्टा रद्द किया गया था, को भंडार बेचने की अनुमति नहीं मिली है.

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बाबूलाल मरांडी ने भी उठाये थे सवाल- लिखा था 7 पन्ने का पत्र

बाबूलाल मरांडी ने भी शाह ब्रदर्स को दी गयी अनुमति को रद्द करने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की थी. श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री को प्रेषित सात पेज के पत्र में मई 2014 से जारी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण में खान सचिव की भूमिका पर सवाल उठाये थे.

उन्होंने साफ कहा था कि इस पूरे प्रकरण में वर्तमान खान सचिव ने खनन पट्टाधारी एवं कतिपय दलालों की मिलीभगत और गलत इरादे के साथ ऐसा आदेश पारित किया, जिससे पट्टाधारी को लाभ मिले. इन्हें राज्य के राजस्व की कोई चिंता नहीं है.

ओएमएम कंपनी को 500 करोड़ का फायदा पहुंचाने का आरोप

पूर्व मंत्री सरयू राय का आरोप है कि प. सिंहभूम का उपायुक्त रहते के श्रीनिवासन ने ओड़िशा मैंगनीज एंड मिनरल्स लि. (ओएमएम) नामक निजी कंपनी को जान-बूझ कर 500 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया. उन्होंने जांच के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भी लिखा था.

डीसी रहते के श्रीनिवासन ने जिला खनन पदाधिकारी को दिये निर्देश में लिखा था कि – “कंपनी ने वर्ष 2009-10 में किये गये 0.615 मिलियन टन के अधिक उत्पादन को वर्ष 2012-13 के वार्षिक उत्पादन 2.00 मिलियन टन में से कंपनसेट (Compensate) करने के लिए कम किया जाता है.

इसी प्रकार वर्ष 2010-11 में कंपनी द्वारा किये गये 0.665 मिलियन टन अधिक उत्पादन को वर्ष 2013-14 के वार्षिक उत्पादन 2 मिलियन टन से कम करने का निर्देश दिया जाता है.”

सरयू राय का कहना था कि जिस गलत काम के लिए कंपनी पर जुर्माना ठोका जाना चाहिए था, उसके लिए डीसी के श्रीनिवासन ने अपने स्तर से कंपनसेट करने का आदेश दे दिया. सरयू राय ने उपायुक्त के आदेश को गैरकानूनी बताते हुए कहा था कि इससे सरकार को करीब 500 करोड़ का नुकसान हुआ है. उन्होंने मुख्यमंत्री तत्कालीन उपायुक्त को चिह्नित करके कार्रवाई करने की मांग भी की थी.

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बालू उठाव में भारी वसूली की बात आयी थी सामने

के श्रीनिवासन ने खान विभाग के सचिव के छोटे से कार्यकाल में बालू में ई-चालान और ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था भी शुरू की थी. श्रीनिवासन को सितंबर 2020 में खान एवं भूतत्व विभाग का सचिव बनाया गया था. एक साल तक वह इस पद पर रहे. इस दौरान वह झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के प्रबंध निदेशक भी थे. बालू के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर ई-चालान व्यवस्था शुरू हुई थी.

मीडिया रिपोर्ट के इनुसार आइएएस के श्रीनिवासन के मुख्य सहयोगी झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के बालू प्रभारी अशोक सिंह थे. इनकी टीम में खान उप निदेशक शंकर सिन्हा तथा उप निदेशक राजेश कुमार पांडेय शामिल थे. शंकर सिन्हा जेएसएमडीसी में निदेशक (खनन) भी रह चुके हैं.

इसके अलावा वह कई साल तक हजारीबाग के जिला खनन पदाधिकारी भी रहे थे. उस समय राज्य के किसी भी बालू घाट की नीलामी नहीं हुई थी. नदियों से बालू उठाव के लिए कोई आदेश नहीं लिया जाता था. बताया जाता है कि बालू उठाव मामले में एक सौ करोड़ से अधिक की वसूली की गयी.

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