
Ranchi. झारखंड के शराब दुकानों में मैनपॉवर सप्लाई कराने का काम का ठेका लेने वाली विजन हॉस्पिटैलिटी एंड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर परमार विपिन भाई को झारखंड हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने परमार विपिन भाई की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उनकी कंपनी ने न केवल दो बार फर्जी बैंक गारंटी दिया, साथ ही हाई कोर्ट को गुमराह कर अंतरिम राहत ली थी.
एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने कोर्ट को बताया कि उक्त कंपनी को झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड से मैनपॉवर सप्लाई एजेंसी का काम 11 जुलाई 2023 को दिया था. इसके एवज में कंपनी ने 27 जुलाई 2023 को बैंक गारंटी दिया था, वह फर्जी था. बैंक गारंटी फर्जी होने के संबंध में उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे एवं जनरल मैनेजर सुधीर कुमार ने वेरिफिकेशन नहीं किया और कंपनी के साथ एग्रीमेंट कर लिया. इसके बाद कंपनी ने उत्पाद विभाग को 28 दिसंबर को फिर चिट्ठी लिखकर पुराने बैंक गारंटी के बदले दूसरा बैंक गारंटी देने का आग्रह किया. अनुमति मिलने के बाद कंपनी ने दूसरा बैंक गारंटी दिया, लेकिन वह भी फर्जी था.
विनय चौबे ने फिर इस बार भी कंपनी की बैंक गारंटी को वेरीफाई नहीं किया. कंपनी पर शराब की बिक्री के स्टॉक में गड़बड़ी का भी आरोप लगा था और झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने घपले किए जाने पर उक्त कंपनी को प्लांटी जमा करने को कहा था. जिसके खिलाफ कंपनी की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी. लेकिन कंपनी ने उस रिट याचिका में हाइकोर्ट में जो दस्तावेज लगाया था, उसमें भी फर्जी बैंक गारंटी लगाया था. कंपनी ने हाई कोर्ट को गुमराह कर उस समय अंतरिम राहत ले ली थी. बाद में झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कंपनी के बैंक गारंटी को वेरीफाई किया तो पाया कि वह फर्जी थी. कोर्ट के संज्ञान में यह बात आने पर कंपनी ने उसे रिट याचिका को वापस ले ली थी.




