
Deoghar : किसानों की धान अधिप्राप्ति के दूसरी किस्त की राशि भुगतान को लेकर 17 मई को भाजपा द्वारा दिए गए वर्चुअल धरना कार्यक्रम पर कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए हमला बोला है. कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के बकाया राशि की भुगतान 15 मई को ही किसानों के खाते में राज्य के 21 जिलों के लिए 158. 51, 4442 करोड़ रूपया का भुगतान किसानों के खाते में कर दिया गया है.
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उन्होंने कहा कि विपक्ष की भी सशक्त भूमिका होती है. खासकर उस समय जब देश और राज्य में कोविड-19 के कारण आपदा का समय हो ऐसे समय में विपक्ष से सकारात्मक भूमिका की उम्मीद करते हैं.
लेकिन जिस तरह से 17 मई को भाजपा ने चीजों को रखने का काम किया क्या वह कहीं से उचित है. मैं विपक्ष से पूछना चाहता हुं कि क्या वे किसानों के संपर्क में हैं ? क्या किसानों के मुद्दे से उनका वास्ता है ? दिल्ली की सड़कों पर 6 माह से घूम रहे किसानों व सैकड़ों शहीद हुए किसानों की ओर उनका ध्यान नहीं जाना चाहिए. राज्य के चतरा, पलामू व गढ़वा जिले में केंद्र की ओर से एफसीआई के द्वारा धान की खरीदारी की गई है.
कृषि मंत्री ने कहा कि धान खरीदारी के समय ही राज्य सरकार किसानों के खाते में 50 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया था. इस काम में कोविड-19 कारन कुछ परेशानियां जरूर हुई। राज्य सरकार अब तक 103 प्रतिशत धान की खरीदने काम किया है। जबकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक राज्य के चतरा, पलामू व गढ़वा में लक्ष्य से 69 प्रतिशत से कम खरीदारी की है। इसको लेकर हमारे विभाग व खाद्य सुरक्षा विभाग ने 30 जून तक डेट बढ़ाने के लिए 6 मई को केंद्र सरकार को पत्र लिखा. लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक उसका कोई उत्तर नहीं मिला है और ना ही पत्राचार हो पाया है.
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यदि विपक्ष के लोग किसानों के मददगार है तो केंद्र से समन्वय स्थापित करने में सहयोग करें. केंद्र में आप की सरकार है आप के सांसद हैं. विपत्ति के समय हम एक दूसरे की कमी को जरूर दिखाएं. विपक्ष की भी एक सशक्त भूमिका होती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. लेकिन जब 15 मई को किसानों को पैसा भेज दिया गया तो ऐसे समय में किसानों को दिग्भ्रमित करना कहीं से उचित नहीं है.
उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि हमारे पैसे केंद्र से बनते हैं क्या उसकी प्राप्ति अब तक हुई है, क्या हमारे हिस्से का पैसा रॉयल्टी व जीएसटी में देने का काम किया गया है. अभी हाल में ही केंद्र सरकार ने जिस राहत पैकेज की घोषणा की है क्या उसमें झारखंड का हिस्सा उचित है. आपदा के समय झारखंड के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है.
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जबकि यह आदिवासी व पिछड़ा बहुल प्रदेश है और यहां की भौगोलिक स्थिति पहाड़ी, पठारी व जंगली क्षेत्र का है. यहां के लोगों के सामने बहुत सारी समस्याएं हैं. राज्य सरकार संवेदनशीलता से काम कर रही है. आप ताकतवर हैं केंद्र में आप की सरकार है हम उम्मीद रखे हुए हैं कि ऐसे समय में केंद्र झारखंड के लिए राहत पैकेज की घोषणा करेगी.




