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शौचालय निर्माण के बाद अब जलसहिया कर रही हैं भुगतान का इंतजार

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Ranchi: स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए प्रखंडों में जलसहियाओं को भी जोड़ा गया है. इससे शौचालय निर्माण के कार्य में तेजी आयी है. झारखंड को समय पूर्व व्यक्तिगत शौचालय बनाने का पुरस्कार भी मिला. इसमें शामिल रहीं कई जल सहियाओं को प्रोत्साहन राशि अभी तक नहीं मिली है. इससे उनका बकाया काफी अधिक हो गया है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई है. पेयजल और स्वच्छता विभाग की ओर से 2010 में ग्रामीण स्तर पर ग्राम जल और स्वच्छता समिति बनायी गयी थी. इस समिति के खाते में सरकार की तरफ से मुखिया को पैसा भेजा जाता था, ताकि व्यक्तिगत शौचालय और जलापूर्ति की आधारभूत संरचना का निर्माण हो सके. सरकार की तरफ से जल सहियाओं को शौचालय निर्माण और जलापूर्ति कनेक्शन दिये जाने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप राशि तय की गयी.

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पहले मिले थे तीन लाख, अब फंड आना हो गया बंद: सुगंती देवी

सुगंती देवी

जलसहिया सुगंती देवी ने बताया कि पहले 25 शौचालय निर्माण के लिए तीन लाख रुपए फंड दिये गये थे. वहीं  प्रत्येक जलसहियाओं को प्रखंड का सर्वे कराने के बाद एक लक्ष्य दिया गया था. शुरू में यह ठीक-ठाक रहा. लेकिन, जैसे-जैसे समय बितता गया फंड आना बंद हो गया. मैंने खुद के पैसे से बचे हुए शौचालय का निर्माण कार्य  पूरा कराया. अब अपने ही पैसे के लिए विभाग का चक्कर लगा रही हूं. उन्होंने बताया कि मैंने 199 शौचालयों का निर्माण कराया था. जबकि अब तक 180 शौचालयों का ही भुगतान प्राप्त हुआ है. शेष 19 शौचालयों का 12000 रुपए के अनुसार 2,28,000 रुपये बकाया है. इसके लिए वह एक साल से विभाग का चक्कर लगा-लगाकर परेशान हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. राज्य भर में 29000 जलसहिया शौचालय निर्माण कराने में लगी हुई हैं.

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प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी गयी

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वार्ड सदस्य लोकेश कुमार ने बताया कि जलसहिया अपनी पारिश्रमिक पाने के लिए लगातार विभाग का चक्कर लगा रहीं है. एक अन्य जलसहिया रेखा सोनी को भी पांच शौचालयों का पैसा नहीं मिला था, बार-बार चक्कर काटने के बाद बुधवार को फंड जारी किया गया है. ये भी एक साल से दौड़ रही थीं. उन्होंने बताया कि इन सहियाओं को प्रोत्साहन राशि के रुप में प्रत्येक शौचालय 75 रुपए दिए जाने थे वह भी अब तक नहीं दिया गया है और न ही उन्हें प्रशस्ति पत्र ही दिया गया है.

मुख्यमंत्री ने की थी जलसहियाओं की तारीफ

कुछ दिन पहले उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू के रांची आगमन के दौरान राज्य के मुखिया रघुवर दास ने जलसहियाओं की तारीफ की थी. उन्होंने यह स्वीकार करते हुए कहा था कि जलसहियाओं के बगैर प्रत्येक प्रखंड में शौचालय बनवा पाना मुमकिन नहीं था. लेकिन, इन्हीं जलसहियाओं को उनके प्रोत्साहान से ही वंचित रखा गया है.

15 नवंबर तक राज्य करना है ओडीएफ घोषित

सरकार जिला को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने  की दिशा में फेल हो चुकी है. सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर ले. लेकिन, जमीनी हकीकत आज भी वही है. गांव की बात तो दूर, राजधानी भी खुले में शौच से मुक्त नहीं हो सकी है. आज भी नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम जब सुबह-सुबह निरीक्षण में निकलती है तो कुछ लोगों को खुलें में शौच करते हुए पकड़ उस पर जुर्माना लगाती है. सरकार द्वारा दो अक्तूबर तक राज्य को खुले में शौच से मुक्त बनाने की घोषणा की थी. इस बढ़ाते हुए 15 नवंबर कर दिया गया है.

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