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ऑटो सेक्टर में मंदी के बाद अब बैंक-इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई सेक्टरों में घटी नौकरी की रफ्तार!

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NW Desk : ऑटो सेक्टर मंदी की मार से बुरी तरह से प्रभावित है. लगातार घटती मांग ने डीलर्स की चिंता बढ़ा दी. कार और बाइकों की बिक्री पिछले दो दशक के सबसे निचले स्तर पर हैं.

जबकि, डीलर्स के पास गाड़ियों का बड़ा स्टॉक बचा हुआ है. ऐसे मंद बाजार में बिक्री को बढ़ाने के लिए कार निर्माता बहुत सारे मॉडल्स पर बड़े डिस्काउंट दे रहे हैं.

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कई कंपनियों ने हायरिंग पर भी लगा दी है रोक

गाड़ियों की डिमांड कम हो गयी है. जिसकी वजह से ऑटो सेक्टर बडे संकट से गुजर रही है. कई दिग्गज कार कंपनियों को अपना प्रोडक्शन घटना पड़ा है.

जिसकी वजह से ऑटो कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों ने अस्थायी कर्मचारियों को काम से हटाना शुरू कर दिया है. इसमें लाखों की नौकरियां जा चुकी हैं. जबकि बहुत सी ऐसी कंपनीयां हैं जिन्होंने नौकरी पर भी रोक लगा दी है.

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देश में बेरोजगारी दर 45 साल के चरम पर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 45 साल के चरम पर है. नयी नौकरियों के लिए हायरिंग की धीमी रफ्तार से अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर पर असर पड़ा है. ऐसे में ज्यदातर सेक्टरों में हायरिंग पर असर पड़ना स्वाभाविक है.

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केयर रेटिंग्स लिमिटेड की एक स्टडी के अनुसार बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों, ऑटो मेकर्स से लेकर लॉजिस्टिक व इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों तक में नयी नौकरियां देने की रफ्तार घट गयी है. 1000 कंपनियों की ओर से मार्च आखिर में दाखिल की गई सालाना रिपोर्ट को आधार पर केयर रेटिंग्स लिमिटेड इस निष्कर्ष पर पहुंची है.

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कम हो रही है बैंकों में हायरिंग की रफ्तार

उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया के सामने निवेश का बड़ा केंद्र के तौर पर खुद को पेश कर रहा है. ऐसे में मोदी सरकार के सामने बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है. मार्च 2017 में कुल 54 लाख 40 हजार रोजगार का आंकड़ा सामने आया था जो कि मार्च 2018 में बढ़कर 57 लाख 80 हजार हो गया, जो 6.2 प्रतिशत की बढ़त है. केयर रेटिंग्स लिमिटेड के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2019 के आखिर में यह बढ़ोत्तरी महज 4.3 प्रतिशत रही. इस दौरान कुल नौकरी पाने वालों की संख्या 60 लाख से कुछ ऊपर रही.

केयर रेटिंग्स लिमिटेड के मुताबिक प्रोडक्शन में कम बढ़ोत्तरी और कंपनियों के दिवालिया होने के कई मामलों की वजह से आयरन, स्टील व माइनिंग कंपनियों में नौकरियां पाने वालों की संख्या घटी है.

बैंकों में भी नौकरियों की रफ्तार कम हो रही है. कुछ सरकारी बैंकों ने तो नयी नौकरियों पर ही रोक लगा दी है. क्योंकि ये बैंक अपनी पूंजी बढ़ाने और एनपीए घटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

 

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