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जानें कौन है वो CMPDI अधिकारी आलोक कुमार, जिसने चामा में हाउसिंग कॉलोनी में जमीन कब्जा कर आदिवासियों को ठगा

Ranchi: रांची के दरभंगा हाउस के सीसीएल कार्यालय में सबसे ऊंची कुर्सी के नजदीकी हैं. रसूखदार हैं. नाम है आलोक कुमार. सीसीएल में GM Environment थे. अब इनका तबादला CMPDI हो गया है.  इससे पहले आलोक कुमार झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSSPS) खेलगांव में सीईओ के पद पर थे. अपने पद पर बने रहने के दौरान इनपर एक बड़े घोटाले का आरोप लगा जिसकी जांच कोल इंडिया लिमिटेड की विजीलेंस टीम कर रही है.

इधर, कांके के चामा मौजा में बन रहे एक आवासीय कॉलोनी के लिए जमीन खरीदने, बेचने, आदिवासियों को अंधेरे में रख कर जमीन कब्जाने के मामले में भी आलोक कुमार का नाम सामने आ रहा है. इनके कारनामों का बखान और कोई नहीं बल्कि वो कर रहे हैं, जिन्हें इन्होंने ठगा है.

गौरतलब है कि इसी हाउसिंग कॉलोनी में पूर्व डीजीपी डीके पांडेय भी आलिशान मकान बना रहे हैं. जिस जमीन पर पूर्व डीजीपी का मकान बन रहा है वह जमीन उनकी पत्नी पूनम पांडेय के नाम पर है.

सीएनटी एक्ट वाली जमीन आदिवासियों से खरीदी

आरोप है कि आलोक कुमार ने कांके के चामा मौजा में हाउसिंग कॉलोनी बनाने के लिए आदिवासियों को ठगा. पैसा व पावर का भरपूर इस्तेमाल किया. पुलिस के कई सीनियर अफसरों का इन्हें सहयोग हासिल था. कुछ आदिवासियों ने बगावत करने की सोची तो उन्हें बंदूक से डराया गया. मारपीट की गयी.

आरोप है कि भोले-भाले आदिवासियों को मोटी रकम की लालच देकर इन्होंने एक कॉलोनी के लिए जमीन खरीदी. वो भी सारे के सारे सीएनटी एक्ट वाले. ऐसी जमीन जो जीएम लैंड है और किसी आदिवासी के दखल में है. उन्होंने उसे 10-12 हजार रुपए प्रति डिसमिल देने का वादा कर अपने कब्जे में ले लिया. रैयती सीएनटी जमीन की कीमत इन्होंने 20-25 हजार रुपए प्रति डिसमिल लगायी.

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किया सीसीएल के कानून का भी उल्लंघन, और अब फोन भी नहीं उठाते

सीसीएल में जीएम के पद पर नौकरी करते हुए उन्होंने अपने कार्यालय का इस्तेमाल इस कारोबार के लिए किया. चामा गांव का ऐसा कोई भी आदिवासी नहीं हैं, जिसकी जमीन इन्होंने छल से हथियायी हो.

ठगे गये सभी आदिवासी इनके ऑफिस का पता जानते हैं. आदिवासी साफ कहते हैं, कि कई बार वो दरभंगा हाउस के ग्राउंड फ्लोर में उनके कार्यालय में पैसे के लिए उनके पास जा चुके हैं. वो अपने ऑफिस में ही बैठ कर आदिवासियों से डीलिंग करते थे.

लेकिन जब पूरी तरह से हाउसिंग कैंपस इन लोगों के कब्जे में आ गयी तो किसी भी आदिवासी, जिनसे इन्होंने जमीन ली है, उनका फोन उठाना बंद कर दिया है. जबकि सीसीएल के CDA (Conduct of Discipline and Appeal Rule) के मुताबिक कोई भी अधिकारी या कर्मी सीसीएल में नौकरी करते वक्त दूसरा कोई काम नहीं कर सकता. ऐसे में इन्होंने सीधे तौर पर इस नियम का उल्लंधन किया है.

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आलोक कुमार ने पक्ष नहीं दिया

न्यूज विंग की तरफ से सीसीएल के जीएम रैंक के अधिकारी आलोक कुमार से पक्ष जानने के लिए इन्हें दो बार फोन किया गया. लेकिन इन्होंने रिसीव नहीं किया. थोड़ी देर के बाद इनके व्हास्टएप और फोन पर मैसेज कर इन्हें अपना पक्ष रखने को कहा गया. लेकिन इनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. अगर आलोक कुमार किसी भी तरह का कोई जवाब देते हैं, तो न्यूज विंग उसे प्रमुखता से छापेगा.

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