
Ranchi: अब 2 जनवरी को राज्य के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से अलग नहीं रहेंगे. झारखंड स्टेट बार काउंसिल की बैठक में शनिवार को यह निर्णय लिया है. बैठक की अध्यक्षता काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्णा ने की, इसमें काउंसिल के 23 सदस्य शामिल हुए. 11 सदस्य वाली अधिवक्ताओं की कमेटी विधानसभा से पारित कोर्ट फीस संशोधन विधेयक 2022 को वापस लेने की मांग को लेकर 2 जनवरी को राज्यपाल से तथा 4 जनवरी को मुख्यमंत्री से मिलेगी. इसके बाद 6 जनवरी या 9 जनवरी को स्टेट बार काउंसिल की फिजिकल बैठक रांची से बाहर होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी.
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झारखंड स्टेट बार कौंसिल की ओर से मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मिलने के लिए काउंसिल के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में काउंसिल सदस्य एके रसीदी, हेमंत सिकरवार, संजय विद्रोही सहित 11 अधिवक्ताओं की कमेटी बनाई गई है. अधिवक्ताओं की कमेटी उनसे मिलकर उनसे कोर्ट फी संशोधन विधेयक वापस लेने, अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट जल्द से जल्द लागू करने की मांग करेगी. बता दें कि स्टेट बार काउंसिल की 24 दिसंबर हुई बैठक में कहा गया था कि कोर्ट फीस संशोधन विधेयक 2022 को वापस नहीं लिया गया तो पूरे राज्य के अधिवक्ता दो जनवरी 2023 से न्यायिक कार्य में शामिल नहीं होंगे. काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्णा ने बताया था कि राज्य सरकार कोर्ट फी संशोधन विधेयक पर अगर सरकार विचार नहीं करती है तो काउंसिल आंदोलन को बाध्य होगा. इसके तहत 2 जनवरी से राज्य के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से खुद को अलग रखेंगे, यह अनिश्चितकालीन भी हो सकता है। कोर्ट फीस संशोधन विधायक सिर्फ आईवास है.




