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धनबाद के राधिका इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल एजुकेशन में नामांकन पर लगी रोक

राज्य नि:शक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा की पत्नी चलाती हैं संस्थान, भारतीय पुनर्वास परिषद (नयी दिल्ली) ने लगायी है रोक

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Ranchi: भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ), नयी दिल्ली ने धनबाद में चल रहे राधिका इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल एजुकेशन संस्थान में दिव्यांग जनों के लिए चलाये जा रहे पाठ्यक्रमों के नामांकन पर रोक लगा दी है. संस्थान में दिव्यांगता से संबंधित डिप्लोमा और डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों के अलावा बीएड और एमएड कोर्स संचालित किये जाते हैं. यह संस्थान राज्य नि:शक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा की पत्नी द्वारा संचालित है.

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इस पर नि:शक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा ने कहा कि उनके संस्थान को विनोबा भावे विश्वविद्यालय से मान्यता मिली हुई है. केंद्र के भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से जहां तक मान्यता समाप्त किये जाने की बातें हैं, उसे हटाने को लेकर पत्राचार और अन्य उपाय किये जा रहे हैं.

मार्च 2016 में हुई थी शिकायत

संस्थान की गतिविधियों पर मार्च 2016 में पुनर्वास परिषद में शिकायत की गयी थी. परिषद के पास चार संस्थानों द्वारा एक ही परिसर में कई पाठ्यक्रम संचालित करने की शिकायतें भी की गयी थीं. इसमें डिप्लोमा इन डिसएबिलिटी ऑफ हियरिंग इंपेयरड, डिसएबिलिटी इन स्पीच थेरेपी, डिसएबिलिटी इन ब्लाइंडनेस थेरेपी और एक डिसएबिलिटी इन मेंटल रिटार्डनेस थेरेपी के कोर्स शामिल हैं. इसके अलावा बीएड और एमएड का कोर्स भी यहां संचालित होता है.

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प्रत्येक बैच में 40-40 युवक-युवतियों का नामांकन संस्थान की तरफ से लिया जाता है. एक ही परिसर में इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के कोर्स भी चलाने की शिकायतें की गयी थीं. संस्थान की गतिविधियों पर केंद्रीय टीम ने मार्च 2016 में जांच भी की थी. इसमें धनबाद के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और अन्य शामिल थे.

परीक्षा दिलाने के नाम पर ली जाती है मोटी रकम

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संस्थान में डिप्लोमा और डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों के संचालन के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है. इसमें परीक्षार्थी के नाम पर दूसरा व्यक्ति भी परीक्षा में शामिल होता है. इसके लिए प्रत्येक परीक्षार्थी से पांच हजार रुपये लिये जाते हैं. इसके अलावा दो हजार रुपये भी अन्य खर्च के लिए वसूली की जाती है. संस्थान की ओर से दिये जानेवाले डिप्लोमा और अन्य प्रमाण पत्र बेंगलुरू विश्वविद्यालय के होते हैं, जिसकी मान्यता आरसीआइ ने रद्द कर दी है.

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RCI से प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रमों के लिए अनुमति लेना जरूरी

रीहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से सभी संस्थानों को डिग्री, डिप्लोमा, स्नातकोत्तर स्तर तथा प्रमाण पत्र स्तरीय पाठ्यक्रमों के लिए चालू शैक्षणिक सत्र के लिए एनओसी लेना जरूरी है. इसमें यह जरूरी है कि संस्थान का संचालन स्वंयसेवी संस्था नहीं कर रहे हैं. प्रत्येक वर्ष अगस्त माह तक संस्थानों को ऑनलाइन एप्रूवल लेना जरूरी है. इसमें यह भी शर्त रहती है कि आरसीआइ के तय नियमों का अवश्य पालन हो. संस्थान में जो भी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी रखे गये हैं, उनका वेतनमान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राज्य सरकार के तय मानदेय के अनुरूप होना चाहिए.

परिषद से लगायी गयी रोक हटाने का किया है आग्रह : संयोजक

राधिका इंस्टीट्यूट के समन्वयक पम्मी प्रसाद की तरफ से भारतीय पुनर्वास परिषद् के अध्यक्ष को पत्र लिख कर संस्थान में चलाये जा रहे सभी पाठ्यक्रमों में लगायी गयी रोक को हटाने का आग्रह किया गया है. यह पत्र 14 सितंबर 2018 को नयी दिल्ली भेजा गया है. पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार के मुख्य आयुक्त नि:शक्त जन के निर्देश पर संस्थान की गतिविधियों की जांच की गयी है. इसके बाद ही संस्थान में होनेवाले नामांकन पर रोक लगायी गयी है. इससे संस्थान को चलाने में दिक्कतें हो रही हैं.

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