
Ranchi: राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों, जरूरतमंद परिवार और पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों के शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए राज्य में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की शुरूआत की गयी. केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से झारखंड में 203 कस्तुरबा स्कूल संचालित हो रहे हैं. यहां क्लास छह से 12वीं तक की पढ़ाई करायी जाती है.
लेकिन यह आवासीय विद्यालय अपनी व्यवस्था की वजह से पिछड़ता जा रहा है. लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए एकेडमिक इयर 2020-21 से इस स्कूल की 25 फीसदी सीटों पर लिखित परीक्षा लेने पर शिक्षा विभाग ने मोहर मुहर लगायी थी. लेकिन नामांकन की इस प्रक्रिया पर मुहर ही लगी रह गयी है.
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जैक को लेना था एंट्रेंस एग्जाम
तत्कालीन परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया को अनुमति दी थी. नयी नामांकन प्रक्रिया के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में संचालित होने वाले कुल 203 कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल की कुल सीटों के 75 फीसदी में नामांकन जिला स्तरीय कमेटी के अनुमोदन पर और शेष 25 फीसदी सीटों में एंट्रेंस से नामांकन इसी सत्र से लेना था. इसके लिए जैक को जिम्मेदारी दी गयी थी.
लेकिन नये एकेडमिक इयर 2020-21 के एडमिशन एंट्रेंस के संबंध में जैक सेक्रेटरी महीप सिंह ने बताया कि जैक को इस संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं दी गयी है. और न ही विभाग की ओर से किसी तरह की कोई चिट्ठी मिली है. ऐसे में कस्तूरबा स्कूल के लिए एडमिशन टेस्ट लेने की कोई संभावना ही नहीं है.
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एकेडमिक इयर 2019-20 में खाली रह गयी 14 हजार से अधिक सीट
एकेडमिक इयर 2019-20 में 1 लाख 1 हजार 500 सीटें थीं, जिसमें से 77 हजार 223 सीटें भरी. 14 हजार 127 सीटें खाली रह गयीं. साल 2018-19 को देखें तो 203 स्कूलों में क्लास छह में केवल 20 हजार 300 सीटें थीं जिसमें से 12 हजार 99 सीटें भरी. 8201 सीटें खाली रह गयी. जबकि 11वीं कक्षा में मात्र 7,283 छात्राओं ने नामांकन लिया. राज्य शिक्षा परियोजना की मानें तो सत्र 2019-20 के लिए 12वीं में 7,628 छात्राएं हैं.
सुविधाओं में भी है भारी कमी
कस्तूरबा स्कूल में छात्राओं की घटती संख्या की वजह केवल नामांकन के प्रति उदासीनता ही नहीं है. बल्कि यहां कर्मचारियों और सुविधाओं का भी घोर अभाव है. कस्तुरबा स्कूल में अकाउंटेंट, हेड कुक, सहायक कुक, नाइट गार्ड, सहायक नाइट गार्ड के लिये कुल 2233 पद स्वीकृत हैं. इनमें से लगभग 1100 पद रिक्त हैं.
कस्तूरबा स्कूल के हर हॉस्टल में एक अकाउंटेंट होने चाहिये. जबकि राज्य के 28 हॉस्टलों में अकाउंटेंट नहीं है. हेड कुक 180 स्कूलों में हैं. 23 में नहीं है. सहायक कुक प्रत्येक हॉस्टल में पांच होने चाहिये. ऐसे 568 पद खाली हैं. 447 सहायक कुक कार्यरत हैं. प्रत्येक हॉस्टल में दो-दो नाइट गार्ड के पद स्वीकृत हैं. ऐसे 406 स्कूलों में मात्र 200 कार्यरत हैं. 206 नाइट गार्ड के पद खाली हैं. सहायक नाइट गार्ड के प्रत्येक स्कूल में दो-दो पद हैं. 406 पदों में से इनकी संख्या केवल 145 है. 261 पद खाली है.
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