Main SliderRanchi

सैम्फॉर्ड अस्पताल पर आरोप: 36 घंटे के ईलाज का बिल 4.60 लाख, रेफर करने कहा तो बताया मृत

परिजनों ने किडनी निकाल लेने का जताया है संदेह

Ranchi: सैमफॉर्ड अस्पताल फिर से एक बार विवाद में है. मरीज के परिजन ने सैम्फोर्ड अस्पताल पर आरोप लगाया है कि ब्रेन हेमरेज के ऑपरेशन के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज का किडनी निकाल लिया है. इसके अलावा परिजनों ने मनमाने तरीके से बिल भी बनाने का आरोप लगाया है. 36 घंट के ईलाज के लिए 4 लाख 60 हजार का बिल बना दिया है. इसके बावजूद मरीज की जान चली गयी. परिजनों ने इसको लेकर जोरदार हंगामा किया है.

हंगामा के बाद शव को परिजनों ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि मामला क्या है. हजारीबाग के सुल्ताना को सड़क दुर्घटना के बाद 18 सितंबर को सैम्फोर्ड में भर्ती कराया गया था. जहां इमरजेंस की हालत में ऑपरेशन किया गया था.

इसे भी पढ़ें: लद्दाख की 6 चोटियों पर पहुंची भारतीय आर्मी, ऊंचाई से रख सकेगी चीन पर नजर

क्या कहता है मेडिकल साइंस

परिजनों ने मीडिया को बताया कि जब हमने पूछा कि सिर का ऑपरेशन हुआ है तो पेट में चीर फाड़ क्यों किया गया है. इसलिये वे आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल ने उनके मरीज की किडनी निकाल ली है. हलांकि मेडिकल साइंस के अनुसार ऐसा होता है कि जब भी ब्रेन खोलकर ऑपरेशन किया जाता है तो सिर के एक तरफ की हड्डी को पेट में थैली बनाकर रख दिया जाता है.

ताकि वो खराब न हो. बाद में कुछ दिनों के बाद ऑपरेशन कर हड्डी माथे में लगा दी जाती है. इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गयी थी. जिससे उन्हें लगा कि मृतक के शरीर से किडनी निकाल ली गयी है.

इसे भी पढ़ेंः कृषि विधेयक पास: कांग्रेस ने कहा- ये लोकतंत्र के लिए काला दिन, 12 पार्टियां उपसभापति के खिलाफ लाएंगी अविश्वास प्रस्ताव

आर्किड रेफर करने की बात कही तो बता दिया मृत

मरीज के परिजनों ने बताया कि 19 की शाम को हमें देखने पर कोई हरकत नजर नहीं आ रही थी. डॉक्टर ने पेट पर मारकर भी दिखाया कोई हरकत नहीं थी. जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रख दिया गया था. हालत में सुधार नहीं होता देख हमने आर्किड अस्पताल जाकर पूरी हालत बतायी. बेड मिल जाने के आश्वासन के बाद हमने मरीज को आर्किड रेफर कर देने के बात कही. जिसके आधे घंटे के बाद हमें बताया गया कि आपके मरीज की मौत हो गयी है.

क्या कहना है अस्पताल प्रबंधन का

मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑपरेशन का चार्ज हमने पहले बता दिया था. इसके बाद भी हमने बहुत अधिक डिस्काउंट दिया. इस ऑपरेशन का चार्ज 2.70 लाख है. पर हमने 1.5 लाख ही मांगा था.  ऑपरेशन से पहले ही हमने परिजनों को क्लीयर कर दिया था कि ऑपरेशन सफल होने के चांसेज कम हैं.

परिजनों की सहमति के बाद ही ऑपरेशन किया गया. जब किसी की मौत हो जाती है तो पैसा नहीं देने के चलते परिजन अस्पताल पर तरह तरह के आरोप लगाते हैं. जिनका ईलाज सही हो जाता है वे दुआ देते हैं.

इसे भी पढ़ेंः विपक्ष के हंगामे के बीच तीन में से दो कृषि बिल राज्यसभा से हुए पास

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button