
Ranchi : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘संवाद’ तथा ‘ग्राम सभा फेडरेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में एचआरडीसी, रांची में शुक्रवार को दो दिवसीय राज्यस्तरीय महिला सम्मेलन शुरू हुआ. शुक्रवार को इसमें झारखंड के विभिन्न जिलों से लगभग 200 से अधिक महिलाएं शामिल हुईं. महिला अधिकारों पर केंद्रित इस सम्मेलन के विमर्श का मुख्य मुद्दा था- ‘संसदीय राजनीति में 50% महिला आरक्षण’ और इसके अनुरूप झारखंड के सभी प्रमुख दलों की महिला प्रतिनिधियों ने इस मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए साथ मिलकर आगे की रणनीति पर काम करने का संकल्प लिया. सम्मेलन में एक मत से यह स्वर उभरकर आया कि संसदीय प्रजातंत्र में महिलाओं को निर्णायक भूमिका निभानी होगी और इसके लिए विशेष प्रावधान करना होगा. रवांडा, अल्जीरिया, सेनेगल जैसे पिछड़े देशों में आरक्षण की विशेष नीतियों ने वहां महिलाओं के हक में सकारात्मक बदलाव लाये हैं. भारत को भी इसी रास्ते पर मजबूती से चलने की जरूरत है.
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राजनीतिक सत्ता में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी से ही कमजोर होगी पितृ सत्ता की गांठ
सम्मलेन का उद्घाटन सामूहिक रूप से नगाड़ा बजाकर तथा दीप जलाकर किया गया. ग्राम सभा फेडरेशन की संयोजिका एनी टुडू ने ग्राम सभा फेडरेशन के बारे में प्रस्तुति की. इसके बाद संवाद की श्रावणी ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि पितृ सत्तात्मक समाज में महिलाओं की सीधी और बराबर की भागीदारी सत्ता में कैसे हो, यह सवाल आज चारों तरफ मुंह बाये खड़ा है. पितृ सत्ता की गांठ तभी कमजोर होगी, जब महिलाओं की 50% भागीदारी राजनीतिक सत्ता में होगी. राजनीतिक सत्ता में महिलाओं की भागीदारी का सवाल 70 के दशक से चर्चा का विषय बना, लेकिन तब से लेकर आज तक देश की राजनितिक पार्टियों ने इस पर ठोस पहल नहीं की है. महिलाओं के संगठन के साथ-साथ जेंडर जस्टिस में विश्वास रखनेवाले तमाम संगठनों ने पूरी शिद्दत से इस मुद्दे को राजनीतिक फलक पर सामने लाया है, लेकिन अब निर्णायक लड़ाई का वक्त आ गया है.

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राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी नगण्य
झारखंड विकास मोर्चा की अनिता गाड़ी ने कहा कि मौजूदा दौर में धन बल और बाहु बल के वर्चस्व के कारण महिला का राजनीतिक प्रतिनिधित्व हाशिये पर रहा है और महिलाओं का आर्थिक सामर्थ्य कई बार जनप्रतिनिधि बनने की राह में बाधक है. झारखंड बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि महिलाओं ने समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहुंच और उपस्तिथि दर्ज करायी है, पर तमाम दावों के बावजूद राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी नगण्य है. आदिवासी समाज के समानता के मूल्यों से सीखते हुए हमें मुख्य धारा की राजनीति में इसे अपनाने की जरूरत है. कांग्रेस की रमा खलखो ने कहा कि महिलाओं को हिम्मत के साथ आगे आकर राजनीतिक नेतृत्व संभालने की जरूरत है. पंचायत चुनाव में महिलाओं ने अपनी क्षमता और नेतृत्व का अहसास कराया है, अब इसे मुख्य राजनीति में दोहराने की जरूरत है. आजसू की वायलेट कच्छप ने कहा कि राजनीति में हावी महिलाओं के प्रति भेदभाव और हाशियाकरण तभी दूर होगा, जब महिलाएं मुख्य भूमिका निभायेंगी.
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राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से अशांत और हिंसाप्रधान दुनिया को बनाया जा सकेगा शांतिमय और सुखदायी
इस सम्मेलन की मुख्य अतिथि जर्मनी की गर्लिन्ड स्नाइडर ने बताया कि जर्मनी में भी महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व आबादी के अनुरूप नहीं है, लेकिन महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह है कि महिलाओं की संवदेनशीलता तथा और अंतर्दृष्टि से समाज की बुनियादी जरूरतों तथा मानवीय पहलुओं पर सर्वाधिक ध्यान मिलता है. सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में जर्मनी की टीना ने कहा कि विकसित देश भी गरीब व विकासशील मुल्कों के जैसे ही बराबरी की लड़ाई लड़ रहे हैं. राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी इस अशांत व हिंसाप्रधान दुनिया को शांतिमय और सुखदायी बनाने में निर्णायक साबित होगी. सत्र का संचालन जमशेदपुर से आयी सलगे मार्डी ने किया. स्वागत में सिसई से आये सांस्कृतिक समूह द्वारा नृत्य तथा गीत की प्रस्तुति दी गयी. सम्मेलन में आये अतिथियों का स्वागत शशि बरला ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मालती, जमील, उमेश, सीमा, सगोरी, पूर्णिमा आदि का विशेष योगदान रहा.
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