
Ranchi: पिछले चार साल में झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम अपने रेवेन्यू गैप को पाट नहीं पाया है. साल दर साल यह गैप बढ़ता ही गया. बिजली वितरण निगम ने पिछले चार साल में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग से टैरिफ के जरिये कुल 31536.4 करोड़ रुपये की मांग की. इसके एवज में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले चार साल में टैरिफ (बिजली दर सहित अन्य खर्च) के जरिये 22948.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी. इसके बावजूद झारखंड राज्य बिजली वितरण का रेवेन्यू गैप 692.70 करोड़ रुपये का बना ही हुआ है.
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किस साल कितने टैरिफ के जरिये कितने का प्रस्ताव
वर्ष 2015-16 में झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम ने बिजली दर सहित अन्य खर्च जोड़कर 6939.10 करोड़ रुपये का राजस्व निर्धारण का प्रस्ताव सौंपा था. इसके विरूद्ध झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 4566.08 करोड़ रुपये राजस्व का ही निर्धारण किया. इसी तरह 2016-17 और 2018 के लिये झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम ने 8836.66 करोड़ रुपये राजस्व निर्धारण का प्रस्ताव सौंपा था. इसके एवज में विद्युत नियामक आयोग ने 5244.86 करोड़ रुपये की ही स्वीकृति दी.
वर्ष 2018-2019 में 7385.40 करोड़ रुपये टैरिफ के जरिये मांगे थे, इसके एवज में नियामक आयोग ने 5973.46 करोड़ रुपये की ही स्वीकृति दी गई. आगामी वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिये झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम ने 8375.24 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, इसके एवज में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 7164.22 करोड़ रुपये की ही स्वीकृति दी.
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वितरण निगम का किस साल कितना राजस्व गैप
वित्तीय वर्ष 2015-16 में झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम का रेवेन्यू गैप 855.52 करोड़ रुपये का था. इसके बाद 2016-17 और 2018 में बिजली वितरण निगम का रेवेन्यू गैप घटकर 705.22 करोड़ रुपये का हुआ. वहीं 2018-19 में रेवेन्यू गैप बढ़कर 1785.68 करोड़ रुपये हो गया. आगामी वित्तीय वर्ष में 2019-20 में रेवेन्यू गैप 692.70 करोड़ का है.
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ऐसा है पिछले चार साल का प्रस्ताव, स्वीकृति और रेवेन्यू गैप
| वित्तीय वर्ष | नियामक आयोग की स्वीकृति(करोड़ में) | रेवेन्यू गैप(करोड़ में) |
| 2015-16 | 4566.08 | 855.52 |
| 2016-17-18 | 5244.85 | 705.22 |
| 2018-19 | 5973.46 | 1785.68 |
| 2019-20 | 7164.22 | 692.70 |
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