
MZ KHAN
पुलवामा के आतंकी हमले के दस दिन के अंदर हमारी वायुसेना (IAF की पश्चिमी कमांड) ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया. ये सिलसिला अभी भी जारी है. आतंकवाद पर अंकुश तो लगना ही चाहिए. दो दशक से अधिक भारत इस आतंक को झेल रहा है. धैर्य की भी एक सीमा होती है. उरी, पठानकोट के बाद एक सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी. अनुमान था कि पाकिस्तान अपने यहां के आतंकी शिविरों को बंद करेगा और आतंकवादियों के खिलाफ सख़्त रवैया अपनायेगा. लेकिन कार्रवाई क्या करता बल्कि इसे संरक्षण ही दे रहा है. वैश्विक स्तर पर इसकी निंदा भी हो रही है. अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने पाक को आर्थिक सहायता देना बन्द कर दिया है. लेकिन चिंता की बात ये है कि देश की पॉलिटिकल लीडरशिप वायुसेना के इस शौर्य और पराक्रम का फ़ायदा उठाना चाहती है, जो देशहित मे नहीं है. प्रधानमंत्री राजनीतिक रैली को संबोधित करते हुए कहते हैं” सौगंध मिट्टी की, भारत को मिटने नहीं दूंगा.” इस समय कूटनीति, धैर्य और विवेक की लड़ाई की ज़रूरत है. पाकिस्तान को कूटनीति से विश्व समुदाय से अलग-थलग करने की ज़रूरत है. युद्धोन्माद से न देश का भला होने वाला है और ना समाज का. अभी मीडिया ने ऐसी स्थिति बना दी है कि हम युद्ध के द्वार पर ढकेल से दिये गये हैं. मीडिया वार रूम बना हुआ है. युद्धोन्माद उफान पर है. मीडिया की भड़काऊ खबरों से जनता भी प्रभावित हो रही है. टीआरपी की लड़ाई में मीडिया कश्मीर में भारत को हरा रहा है. कश्मीरियों को किनारे कर हम कश्मीर की जंग नहीं जीत सकते. आतंकी तो यही चाहते हैं कि कश्मीरियों के गुस्से, नाराज़गी, आक्रोश को अपनी ओर मोड़ा जाये. अभी भी इनकी अच्छी-खासी तादाद हिंदुस्तान की तरफ़ पुरउम्मीद निगाहों से देखती है. और यहां अपना मुस्तक़बिल महफूज़ समझती है. हमें इस समय मीडिया की खबरों पर विश्वास न कर आधिकारिक खबरों (सरकारी/सेना) की खबरों पर विश्वास करना चाहिये. एक राज्य के गवर्नर ने कश्मीरियों के बायकॉट की बात कह कर आग में घी डालने का काम किया है.
असंवैधानिक बयानों से हो सकता है नुकसान
परन्तु दुख इस बात का है कि केंद्र सरकार ने भी संवैधानिक पद पर बैठे इस किस्म के असंवैधानिक बयान देने वाले शख्स को अब तक नहीं हटाया है. वैसे जंग किसी मसले का हल नहीं है. पाकिस्तान से तीन लड़ाइयां लड़ी गयीं लेकिन न तो कश्मीर का हल निकला और न आतंकवाद ही खत्म हुआ. वार्ता से ही इसका हल निकल सकता है. बीबीसी के संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से वार्ता करते हुए प्रो क्रिस्टिना फ़ेयर ने कहती हैं,” भारत के चुनावों में मोदी की जीत से सबसे ज़्यादा फ़ायदा पाकिस्तान के डीप स्टेट को ही होता है. इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान में इस समय कई किस्म के घरेलू दबाव हैं, सबसे बड़ी समस्या पश्तून आंदोलन की है, जो पाकिस्तान की अखंडता के लिए ख़तरा है. बलूचिस्तान में चल रहा संघर्ष भी पाकिस्तान के लिए खतरा है. एक मजबूत भारत की ओर से ख़तरा पाकिस्तान को आंतरिक तौर पर एकजुट करता है.” भारत अगर कुटनीतिक तरीके से आतंकवाद को खत्म करना चाहता है, तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहये.




