
Ranchi : विनोवा भावे विवि में शुक्रवार को सहयोग झारखंड के साथ मिलकर खनन पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. जिसमें विवि के कुलपति डॉ रमेश कुमार रमेश ने कहा कि खनन को बंद नहीं किया जा सकता. लेकिन हमें यह सुनिश्चि करना होगा कि खनन सुरक्षित हो और इसकी जिम्मेवारी कोल कंपनियों की है. खनन क्षेत्र में कई प्रकार की समस्याएं जन्म ले लेती हैं. पीने के पानी, पर्यावरण, सीएसआर के मुद्दे पर बातें होती हैं, लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए सिविल सोसाइटी को अपनी भूमिका निभानी होगी. उन्होंने कहा कि खनन से सामाजिक जन जीवन भी असंतुलित होता है, हमें इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. कार्यक्रम का आयोजन विवि के आर्यभट्ट सभागार में किया गया.
लाभ के कारण कंपनियां ईमानदारी नहीं बरतती
भूगर्भ शास्त्र के प्रोफेसर अभय सिन्हा ने कहा कि कंपनियां लाभ कमाना अपना प्राथमिक उद्देश्य समझती हैं. इस कारण सामाजिक दायित्व को निभाने में कंपनियां इमानदारी नहीं बरत पाती. कंपनियों द्वारा सही तरीके से खनन कर उत्पन्न होने वाले सामाजिक एवं पर्यावरण समस्याओं को लेकर अध्ययन नहीं किया जा रहा है. इस कारण अच्छे परिणाम निकलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं. वहीं भूगर्भ शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष विपिन सिन्हा ने कहा कि खनन को लेकर सरकार और पर्यावरणविदों की अलग अलग राय है. इसमें बीच का रास्ता निकालना होगा. जिससे इसके प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रभाव पर ध्यान दिया जाये.
युवाओं की टीम है सहयोग झारखंड
सहयोग झारखंड की जानकारी देते हुए संयोजक संजय मेहता ने कहा कि यह युवाओं की टीम है. जो राज्य के अलग अलग हिस्सों में खनन कार्यों को लेकर कार्य कर रही है. जिसमें विशेषज्ञों को बतौर सलाहकार शामिल किया गया है.
ये थे उपस्थित
मौके पर रूसा के निदेशक एलपी मिश्रा, विकास कुमार, बीरेंद्र गुप्ता, बिनोद रंजन, अंशुमन सिंह, अख्तर हाशमी, नितेश तिवारी, समशेर, अजय मेहता, आर्यकांत मेहता समेत अन्य लोग मौजूद थे.




