
Dhanbad: नगर निगम में कार्यरत 500 गैर स्थायी सदस्यों का हो रहा है शोषण. उनको पेमेंट समय पर कभी नहीं दिया जाता. उन्हें चार-पांच महीने में एक बार ही कई अर्जियों के बाद तनख्वाह दी जाती है. वह भी चार महीने बकाये के बदले काफी खुशामद के बाद केवल एक महीने की ही तनख़्वाह दी जाती है. जबकि इन कर्मचारियों के साथ सिर्फ छह महीने का ही अनुबंध किया जाता है.
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ना बोनस, ना छुट्टी
साथ ही लोगों को निगम की तरफ से प्रतिदिन के हिसाब से मात्र 339 रुपये तनख़्वाह के रूप में दिये जाते हैं. वो भी ‘नो वर्क नो पे’ के पॉलिसी के साथ. गौरतलब है कि कर्मचारियों के काम के आधार पर ही 6 महीने के अनुबंध को दोबारा बढ़ाया जाता है. हालात तो ऐसे हैं कि न ही उन्हें कोई स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त है और न ही किसी त्योहार पर छुट्टी. अगर वो खुद से कभी छुट्टी लेते हैं तो उनको तन्ख्वाह नहीं दी जाती. इसके अलावा न ही कभी किसी तरह का बोनस त्योहार पर मिलता है. कई कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिलने से परिवार चलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. हद तो यह है कि समय-समय पर इन लोगों का कार्य और विभाग भी बदल दिया जाता है.
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‘देखते हैं’ बोलकर प्रबंधन हर बार टाल जाता है वेतन देने की बात
निगम में कार्यरत कर्मचारियों की बदहाली ऐसी है कि जब कई महीनों के बकाया वेतन की मांग प्रबंधन के अधिकारियों से करते हैं. तो ‘देखते हैं’ कहकर बात टाल दी जाती है. और यह सिलसिला कई महीनों तक चलता रहता है. इसके बाद एक महीने का वेतन देकर खानापूर्ति के लिए दिया जाता है.
नाम न छापने की शर्त पर ही रेवेन्यू विभाग के दो कर्मचारियों ने बताया कि उनको 3 महीने से वेतन नहीं मिला है. कई बार वेतन देने के लिये आग्रह भी किया, लेकिन अधिकारी देखते हैं कहकर बात टाल गये. जबकि तीन-चार महीने के बकाये में मात्र एक महीना का ही वेतन देने की खानापूर्ति की जाती है.
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उनलोगों ने बताया कि उन्हें हर रोज दस हजार रेवन्यू वसूल कर लाने का लक्ष्य दिया जाता है. जबकि इस दौरान आने-जाने का भाड़ा भी अलग से नहीं मिलता. हर दिन के 339 रुपये मिलते हैं. उसी से भाड़ा और खाना का खर्च भी करना पड़ता है. साथ ही ‘नो वर्क नो पे’ की पॉलिसी अपनाई जाती है.




