
Nikhil Kumar
Ranchi: गढ़वा बाइपास निर्माण सरकार के लिए गले की हड्डी बन गयी है. गढ़वा जिला प्रशासन से लेकर राज्य व केंद्र सरकार तक यह बाइपास फिलहाल चर्चा का विषय बन गया है. आखिर कैसे 90 फीसदी तक बने इस बाइपास का निर्माण पूर्ण कराया जाए. मामला शंखा से खजूरी सेक्शन में गढ़वा बाइपास के फोरलेनिंग का है. एनएच 75 में इस बाइपास का निर्माण नवाडीह विलेज के अचला में 0.55 किमी का काम अतिक्रमण के कारण लंबित है. रास्ते में कब्रिस्तान है. स्थानीय लोगों का इसे लेकर विरोध है. कब्रिस्तान हटाने नहीं दिया जा रहा है, इस वजह से काम लंबित हो गया है.
काम लंबित होता देख एनएचआई चेयरमैन व आइएएस अधिकारी संतोष कुमार यादव विशेष रूप से 22 जून को रांची आ रहे हैं. यहां एनएचएआई के अधिकारियों के साथ पहले इस मसले पर चर्चा करेंगे. 23 जून को राज्य के मुख्य सचिव से इस पर बात भी करेंगे. मामले के समाधान के लिए वे राज्य सरकार से पहल करने का अनुरोध करेंगे. गढ़वा बाइपास का निर्माण खजूरी में भी कुछ दूर लटका है. ग्रामीण यहां जमीन देना चाहते पर उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है. प्रशासन व सरकार की अनदेखी की वजह से यहां पर भी काम फंसा हुआ है. इस मसले पर भी सरकार के स्तर पर बातचीत की जायेगी. हालांकि, यह बाइपास प्रशासनिक से अधिक राजनीति भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. बाइपास निर्माण के रास्ते में कब्रिस्तान पड़ने की वजह से एक समुदाय के लोग यहां रोड बनाने का विरोध कर रहे है.
राज्य सरकार ने भी उनकी बात मानते हुए अपना हाथ खड़े कर दिए हैं. सरकार के सचिव ने भी इस मसले पर केंद्रीय पथ एवं परिवहन मंत्रालय को पत्र लिखा है और गढ़वा बाइपास निर्माण में आ रही समस्याओं से अवगत कराया है. सचिव ने स्पष्ट कह दिया है कि कब्रिस्तान होने की वजह से वहां पर रोड बनाने मुश्किल है. ऐसे में वहां पीलर इत्यादि उठाकर दूसरे रास्ते से रोड बनाने पर विचार किया जा सकता है. पूरे मसले पर विगत दिनों केंद्रीय टीम गढ़वा गयी थी. अधिकारियों ने सारी स्थिति की जानकारी लेकर एनएचएआई के चेयरमैन और भारत सरकार को अवगत कराया था.
केंद्रीय टीम ने दस्तावेज को खंगाला था,2.23 किमी रोड का काम बाकी
केंद्रीय टीम विगत दिनों गढ़वा जिला के दौरे पर थी. बाइपास निर्माण की स्थिति पर चर्चा की थी. 23 किमी लंबे इस रोड का निर्माण 888 करोड़ से अधिक की लागत में किया जा रहा है. शिवालया कंस्ट्रक्शन इसका निर्माण करा रही है. 23 किमी लंबे इस रोड का निर्माण 20.50 किमी तक हो गया है. लगभग 2.25 किमी रोड का काम बाकी है. अक्टूबर 2023 में इसे पूरा कराने का लक्ष्य है. केंद्रीय टीम ने अंचल अधिकारियों के साथ दस्तावेजों की जांच की. जमीन की स्थिति की जांच भी की.
पहले गढ़वा प्रशासन ने जमीन को गैरमजरूआ बताया था
दरअसल,गढ़वा बाइपास की जमीन अधिग्रहण का मामला विवादों में आ गया है. बाइपास निर्माण कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा है. गढ़वा अंचल के इलाके में बाइपास कब्रिस्तान से होकर गुजर रहा है. जिस कारण स्थानीय ग्रामीण इसके विरोध में उतर गये हैं. जिस वक्त गढ़वा बाइपास का निर्माण का डीपीआर तैयार किया जारहा था उस दौरान गढ़वा जिला प्रशासन की तरफ से सौंपी गयी रिपोर्ट में संबंधित जमीन को गैरमजरूआ बताया गया था. बता दें कि, 2021 में इस रोड का काम प्रारंभ हुआ है. इसी साल 2023 तक इसे पूरा कर देना था.
झारखंड सरकार ने विधि -व्यवस्था का दिया है हवाला
प्रोजेक्ट 90 फीसदी पूरा होने के बाद स्थानीय लोगों ने कब्रिस्तान के पास विरोध शुरू कर दिया है. मामले में स्थानीय ग्रामीण हाईकोर्ट भी गये थे. जहां फैसले से पहले रिट को वापस ले लिया गया था. पूरे मामले में झारखंड सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी ने विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए जमीन अधिग्रहण करने में असमर्थता जतायी है.
झारखंड सरकार के मंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को कराया है अवगत
झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने अचला कब्रिस्तान की समस्या से केंद्रीय पथ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को अवगत कराया है. 22 फरवरी 2023 को ही उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की है. इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ने जल्द ही समस्या निराकरण का आश्वासन दिया था. हालांकि, पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर का कहना है कि पहले भी इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया गया था,लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक रास्ता निकालकर वहां पर बाइपास निर्माण कराये जाने की जरूरत है.
मंत्री मिथलेश ठाकुर नहीं चाहते बाइपास का निर्माण पूरा हो:भानु प्रताप शाही
भाजपा से गढ़वा के भवनाथपुर विधायक भानू प्रताप शाही से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बाइपास निर्माण लटकने की सीधा वजह से झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री व गढ़वा विधायक मिथलेश ठाकुर पर आरोप लगा दिया है. उन्होंने न्यूजविंग से बात करते हुए कहा कि राज्य के मंत्री ही नहीं चाहते की यह बाइपास बने. इसमें राजनीति हो रही है. केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर इस वजह से ग्रहण लग रहा है.
आरओबी निर्माण कराये सरकार: गिरिनाथ सिंह
भाजपा नेता गिरिनाथ सिंह ने इस संबंध में कहा कि बाइपास निर्माण के शुरूआत में यह मामला सामने आया था. हमने भारत सरकार को इस जगह आरओबी बनाने के लिए पत्र भी लिखा था. लेकिन, उस वक्त किसी ने नहीं ध्यान दिया. अब यह मामला जब फंस गया है तो हर ओर हो-हंगामा हो रहा है. राज्य सरकार को अविलंब सारे मसलों का हल करते हुए अविलंब बाइपास निर्माण का पूरा करना चाहिए.




