
Akshay Kumar Jha
Ranchi: झारखंड में जमीन की खरीद-बिक्री कैसी होती है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण है रांची जिले के नामकुम अंजल के पुगड़ु मौजा का 9.30 एकड़ जमीन. करीब चार सालों तक भू -जस्व और जिला प्रशासन कन्फ्यूजन रहा और आखिर में हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि जमीन न्युक्लियस के मालिक विष्णु अग्रवाल की है. कोर्ट ने यह भी कहा कि विष्णु अग्रवाल सात तीनों के अंदर जमाबंदी के लिए आवेदन करें और तीन हफ्तों के अंदर अंचल अधिकारी म्यूटेशन कायम करें. यह मामला मीडिया में भी काफी छाया रहा. लेकिन न्यूज विंग आपको बताने जा रहा है कि कैसे भू-राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कन्फ्यूज रहा. एक-दूसरे पर दोषारोपण करता रहा और यह जमीन खास महल की सूची से निकलकर अब पूरी कानूनी तरीके से विष्णु अग्रवाल की हो गयी.
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दो तत्कीलन डीसी, डीसीएलआर और विभाग करते रहे झकझूमर
– रांची जिले के नामकुम अंचल के पुगड़ु मौजा की खाता संख्या 543, 544 और 546 कुल 9.30 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री विष्णु अग्रवाल ने नौ अक्टूबर 2019 को करायी. इसके बाद से ही सारा खेल शुरू हुआ. रजिस्ट्री होने के बाद से ही सारा खेल शुरू हुआ. विभाग ने तत्कालीन रांची के डीसी राय महिमापत रे से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी. विभाग ने पूछा कि क्या यहब जमीन खासमहल की सूची में आती है. श्री रे ने मामले पर आठ जनवरी 2020 को विभाग को जवाब दिया. उन्होंने लिखा कि डीसीएलआर ने 15/05/2015 और मैंने 13/08/2019 को जो खासमहल की सूची रांची जिला निबंधक को सौंपी उसमें पुगड़ु वाली जमीन खासमहल की सूची में नहीं है.
– इसी मामले पर फिर से एक बार तत्कालीन डीसी छवि रंजन ने 05/12/2020 विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में डीसी छवि रंजन ने साफ लिखा कि मामले पर उन्होंने तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया. जांच समिति की अध्यक्षता अपर समाहर्ता (एसी) कर रहे थे. एसी ने अपनी जांच रिपोर्ट ने कहा कि 10/12/2013 को ही जमीन की लीज नवीकरण के लिए आयुक्त के सचिव को आवेदन दिया गया था. 01/04/2014 से अगले तीस सालों के लिए लीज नवीकरण का अनुरोध किया गया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह जमीन खासमहल की है. इसके अलावा अपर समाहर्ता ने भी साफ लिखा कि डीड और अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट के अध्ययन से यह साफ होता है कि जमीन खासमहल प्रकृति की है. तत्कालीन डीसी छवि रंजन ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि इससे पहले भी तत्कालीन डीसी ने राज्य बनाम मूबारक हुसैन मामले में जमाबंदी को रद्द करने का आदेश दिया था. डीसी ने आगे लिखा कि 27/11/2020 को खासमहल पदाधिकारी सह भूमि सुधार उपसमाहर्ता से जमीन के संबंध में पूछा गया. लेकिन उन्होंने इस जमीन को खासमहल बताने से इंकार कर दिया. जबकि पूरे मामले को देखते हुए यह साफ है कि जमीन खासमहल प्रकृति की है. ऐसे में जिला अवर निबंधक और खासमहल पदाधिकारी की इस जमीन की रजिस्ट्री में संलिप्तता प्रतीत होती है. जिला अवर निबंधक ने सभी तथ्यों को छिपाते हुए Due diligence follow नहीं किया. इसलिए इस जमीन मामले में उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा मैं करता हूं.




