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हाइकोर्ट ने योगेंद्र साव को पहले जमानत दी, फिर आदेश बदला, सुप्रीम कोर्ट ने जांच कर चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी

खंडपीठ ने मामले को अत्यधिक गंभीर बताया
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Ranchi, 08 November: बड़कागांव गोली कांड में गिरफ्तार पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को हाई कोर्ट के द्वारा जमानत देने, फिर जमानत आदेश को बदलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले की जांच कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी. बड़कागांव के विधायक निर्मला देवी बनाम झारखंड सरकार के मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव व न्यायमूर्ति एसए बोबदे की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया.

जमानत आदेश पहले वेबसाइट पर अपलोड किया, फिर हटाया

निर्मला देवी के अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया कि दोनों ही जमानत याचिकाओं के दूसरे हिस्से के आदेश को हाइकोर्ट की वेबसाइट पर पहले अपलोड किया गया. बाद में इन्हें हटा दिया गया. यह आदेश अब हाइकोर्ट की वेबसाइट पर नहीं दिखता है. निर्मला देवी के वकील विवेक के तानखा की दलील सुनने के बाद खंडपीठ ने इसे अत्यधिक गंभीर मामला करार दिया. मामले की जांच का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि झारखंड हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले की जांच करायें कि कैसे वेबसाइट पर फैसला अपलोड किया गया और बाद में हटाया गया. हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जांच रिपोर्ट को अपनी टिप्पणी के साथ चार सप्ताह के अंदर सीलबंद लिफाफे में पेश करें.

 निर्मला देवी ने दी थी चुनौती

निर्मला देवी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (क्रिमनल- 7988-2017) दायर कर झारखंड हाइकोर्ट की ओर से जमानत आदेश में किये गये बदलाव को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई आठ नवंबर को हुई. निर्मला देवी के अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि झारखंड हाइकोर्ट ने निर्मला देवी की जमानत याचिका (4706-2017) और योगेंद्र साव की जमानत याचिका ( 5019-2017) पर अलग-अलग तिथियों पर अपना आदेश दिया. निर्मला देवी की जमानत याचिका पर हाइकोर्ट का आदेश दो हिस्सों में है. पहला हिस्सा चौथे पेज पर समाप्त होता है. इसमें जमानत रद्द करने का आदेश है. दूसरे हिस्से में भी जमानत रद्द करने का आदेश है. दोनों ही आदेश पर माननीय न्यायाधीश के हस्ताक्षर हैं. योगेंद्र साव की जमानत याचिका पर भी हाइकोर्ट का आदेश दो हिस्सों में है. पहला हिस्सा चौथे पेज पर समाप्त होता है. इसमें जमानत रद्द करने का आदेश है. दूसरे हिस्से में 50 हजार रुपये के बांड पर जमानत देने का आदेश है. आदेश का दोनों हिस्सा एक दूसरे के उलट है. उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद योगेंद्र साव के भाई ने रांची में प्रेस कांफ्रेंस करके इस मामले की जानकारी मीडिया को दी थी. मीडिया में खबरें आने के बाद भी मामले पर किसी ने गौर नहीं किया था. योगेंद्र साव के भाई ने उसी वक्त मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात कही थी. 

गोलीकांड में मारे गये थे चार ग्रामीण 

मामला एक अक्तूबर 2016 को बड़कागांव गोली कांड से जुड़ा. एनटीपीसी कंपनी द्वारा ट्रांसपोर्टिंग का काम शुरु किए जाने के खिलाफ विधायक निर्मला देवी ने मुआवजा सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन किया था. वह महिलाओं के साथ चिता सत्याग्रह पर पर बैठी थी. आंदोलन का नाम कफन सत्याग्रह रखा गया था. जिला प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए विधायक को गिरफ्तार कर लिया और अपने साथ ले जाने लगा. इस बीच आम लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई. जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग की. पुलिस फायरिंग में इसमें चार लोग मोहम्मद मेहताब, रंजन कुमा दास, अभिषेक कुमार राय व राजेश साव की मौत हो गयी. दो दर्जन ग्रामीण घायल हुए थे. एसपी कुलदीप कुमार अंचलाधिकारी शैलेश सिंह सहित प्रशासन से जुड़े 17 लोग घायल हुए थे. मामले में जिला प्रशासन द्वारा बड़कागांव थाने में प्राथमिकी ( 228/2016) दर्ज की गयी थी. इसमें विधायक निर्मला देवी, योगेंद्र साव सहित अन्य को अभियुक्त बनाया गया था.

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