Md. Asghar Khan
Ranchi, 09 November: शहर से महज 12 किमी दूर बसी एक बस्ती हर तरह के सरकारी सुविधाओं की वंचित है. इसकी सूरत आज भी पुराने जमाने के सुदूर बस्ती जैसी है, जहां ना तो पक्की सड़क है और ना ही पानी की सुविधा. लगभग 350 घरों वाली इस बस्ती में एक भी चापाकल नहीं है. पानी के लिए लोग एक छोटे से कुएं पर निर्भर हैं, वो भी गर्मियों में धोखा दे देता है. ब्रिटिश जमाने में बने इस कुएं की गहराई 20 फीट से ज्यादा नहीं है. सरकार के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती यह तस्वीर जगरनाथपुर के वार्ड नंबर 43 न्यू कॉलोनी की है. इस बस्ती के लोग अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. लोगों ने अपनी अर्जी वार्ड पार्षद से लेकर विधायक तक लगाई है, पर सब ने बस आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. यह बस्ती उसी क्षेत्र में है जहां रांची को स्मार्ट सीटी बनाने की आधारशिला उपराष्ट्रपित रख चुके हैं.
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काछ- काछ के एक ग्लास पानी निकालते हैं
सरस्वती देवी बताती हैं कि कुएं का पानी इतना गंदा और मैला होता है कि उसे पिया ही नहीं जा सकता है. कुएं से पानी निकालने के बाद काछना पड़ता है. बरसात के मौसम में फिर भी पानी नसीब होता है, पर गर्मी शुरू होते ही बस्ती वाले पानी के लिए तरस जाते हैं. वहीं, मुला देवी कहती हैं कि गर्मी में कुएं भी सुख जाते हैं. पानी की किल्लत इतनी हो जाती है कि अंधेरा रहते ही पानी भरने के लिए लोग कुएं पर लाइन लगा देते हैं. इधर वहीं रहने वाली जयंती उरांव का कहना है कि अगर मोहल्ले में सरकारी चापाकल लग जाए, तो कुछ हद तक परेशानी का हल हो सकता है. वो बताती हैं कि निगम की बोरिंग यहां से एक किलोमिटर दूर है, अगर वहां हमलोग पानी लेने जाते हैं तो वहां के लोग पानी लेने नहीं देते हैं.
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सुविधा के नाम पर पांच हजार रुपए मागंते हैं पार्षद
गिने-चुने घर को छोड़ दें तो बस्ती के अधिकतर लोग शौचालय की सुविधा से वंचित हैं. शौच के लिए इन्हें झाड़ी या पास के खेत का रुख करना पड़ता है. मुन्नी देवी और सीमा कहती हैं कि शौच के लिए खेत जाने पर खेत के मालिक से गाली सुननी पड़ती है. आशा मलाह ने बताया कि जब वह पार्षद के पास पानी की समास्या लेकर पहुंची तो पार्षद ने सुविधा के एवज में पांच हजार रुपए की मांग कर दी. आशा ने बताया कि शौचालय के लिए भी पार्षद ने उनसे दो हजार रुपए की मांग की थी. अनील तिर्की कहते हैं कि सड़क-पानी की परेशानी विधायक नवीन जयासवाल को भी सुना चुके हैं. हर साल बरसात में बस्ती तलाबनुमा हो जाती है. अंत में मिट्टी की सड़क बनाकर हम काम चलाते हैं.
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गरीब हो, गरीब जैसे रहो, ज्यादा उड़ो मत
मोहल्ले की सीती देवी, मुन्नी देवी, बुधेश्वर सिंह, आशा देवी, खिरवंधर सिंह, सीमा देवी, सावना मलाह समेत अन्य कई और लोग अपना वोटर, आधार कार्ड, बिजली बिल, होल्डिंग टैक्स की रसीद दिखाते हुए कहते हैं कि पार्षद हमें इस मोहल्ले का निवासी नहीं मानती हैं. किसी भी काम के लिए जाते हैं तो कहती हैं कि अपना पहले प्रूफ दिजीए कि आप इस मोहल्ले के निवासी है. जब सबकुछ सामने रखते हैं तो कहती हैं कि गरीब हो, गरीब जैसा रहो, ज्यादा उड़ो मत. सोनी देवी और पारत देवी बताती हैं कि हमलोग यहां दस साल से रह रहे हैं, फिर भी हर तरह की सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.
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जितना फंड था, उतना काम किया गया हैः पार्षद
वार्ड नंबर 43 पार्षद चंदा देवी ने कहा कि जितना सरकार फंड देती है, उतने का काम किया गया है. सरकार की ओर से हमें पांच चापाकल लगाने को मिले थे. जहां जरुरत थी वहां चापाकल लगाए गए हैं. जब सरकार की ओर से और फंड मिलेगा तो बचा हुआ काम किया जाएगा. शौचालय के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आधे से ज्यादा घरों में शौचालय बन गए हैं. कुछ घर बचे हुए हैं जहां जल्द ही शौचालय बनवा दिए जाएंगे.
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