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Ranchi, 05 November : करम टोली स्थित आईएमए हॉल में जिंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन ने निशुल्क एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ किया. संस्था ने रविवार को शाम चार बजे सेवा का आरंभ किया. फाउंडेशन के अध्यक्ष अश्विनी राजगढ़िया ने बताया कि मरीजों की समुचित सेवा ही जिंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन का उद्देश्य है.
अंतिम संस्कार की भी व्यवस्था करेगी संस्था
अश्विनी राजगढ़िया ने बताया ने बताया कि संस्था शवों को घर पहुंचाने और घर से अस्पताल जाने के लिए जरूरतमंदों को आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस मुहैया करायेगी. फाउंडेशन के माध्यम से सबसे पहले शवों को शमशान पहुंचाने का काम शुरू होगा. जरूरतमंदों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी फाउंडेशन ही करेगा. साथ ही मरीजों को रिम्स गेट से इमरजेंसी, कैजुअल्टी तक पहुंचाने के लिए ट्रॉली और स्ट्रेचर की सेवा भी उपलब्ध करायेगा.
हेल्पलाईन नंबर 9709500007 जारी
वैसे मरीज जिन्हें समाज लावारिस कह कर सुविधाओं से वंचित कर देती है, उन मरीजों को फाउंडेशन सभी सुविधाएं उप्लब्द्ध कराएगी. इनके लिए अटेंडेंट की सुविधा भी दी जाएगी. यह सारी सुविधाएं मुफ्त होंगी. सभी सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए हेल्पलाईन नंबर 9709500007 जारी किया गया है. सभी सुविधाएं इसी नंबर से प्राप्त की जा सकेंगी.
शुरु में रांची के 100 किलोमीटर के दायरे में सुविधा दी जाएगी
श्री राजगढ़िया ने कहा कि हमारी पहल से मरीजों को हर सुविधा प्राप्त होगी. शुरूआत में राजधानी के आसपास के सौ किलोमीटर के दायरे में यह सुविधा दी जाएगी. जरूरत के हिसाब से इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी. इस फाउंडेशन में मेरे साथ और 13 साथी हैं. टीम में आलोक अग्रवाल, अरविंद मंगल, हर्षवर्धन बजाज, जयप्रकाश सिंघानिया, निखिल केडिया, रमन साबू, साकेत सर्राफ, सचिन सिंघानिया, सौरभ मोदी, विक्रम साबू, विपुल अग्रवाल, विनीत अग्रवाल, विवेक बागला है. इन सभी की मदद से यह कार्य किया जा रहा है.
संस्था से जुड़कर मदद करने की अपील
फाउंडेशन के अध्यक्ष ने संस्था से जुड़कर मदद करने की लोगों से अपील की. उन्होंने कहा कि हमने महसूस किया है जिस पत्नी के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने के किसी ने फेरे लिए हों, उसी की लाश कंधे पर उठाकर 12 किमी पैदल चलना पड़े तो उस पर क्या बीती होगी. उस दर्द की, उस पीड़ा की, उस वेदना की कल्पना मात्र से रोम-रोम सिहर उठता है. यह कल्पना हमने की है. हमने एहसास किया है उस तड़पती हुई गर्भवती महिला के दर्द को जो एंबुलेंस के अभाव में अस्पताल भी न पहुंच पायी.




