Uncategorized

रांची : जेपीएससी मेंस परीक्षा रद्द होने से छात्र निराश, पूछ रहे कि आखिर कब सुधरेगा सिस्टम

Ranchi: झारखंड राज्‍य के 18 सालों में झारखंड लोक सेवा आयोग का प्रदर्शन निहायत ही बुरा रहा है. पिछले 17 सालों में आयोग सिर्फ छह नियुक्तियां ही करा पायी है. इनमें से एक भी नियुक्ति प्रक्रिया बिना धांधली और भ्रष्‍टाचार के पूरी नहीं हो पायी. विवादों में रहने की वजह से हर नियुक्ति का समय लंबा खींचता चला गया. कभी इसकी जांच निगरानी के द्वारा लं‍बी चली तो कभी हाईकोर्ट की न्‍याय प्रकिया में समय खींचता चला गया.  जेपीएससी ने बैच नंबर एक और दो के लिए जो बहाली की थी, उसकी कुछ साल बाद जांच हुई तो पाया गया कि परीक्षा की जगह धांधली हुई है. कुल मिलाकर खराब व्‍यवस्‍था और भ्रष्‍टाचार के कारण इसका खामियाजा यहां के बेरोजगार युवाओं और छात्रों को उठाना पड़ा.

इसे भी पढ़ें  – जेपीएससी मुख्य परीक्षा रद्द होने पर क्रेडिट लेने की होड़ में सत्ता पक्ष

परीक्षा रद्द होने पर  छात्रों का राय 

छात्र नेता मनोज कुमार का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी ये दोनों आयोग परीक्षा नहीं ले रहे हैं, बल्कि ये दोनों आयोग छात्रों का भविष्‍य बर्बाद कर रहे हैं. इसके लिए हरेक बार नया-नया पेंच लगाया जाता है और विवादों में फंसाया जाता है. पहले से चौथे जेपीएससी तक में आरक्षण दिया गया. जो परीक्षार्थी आरक्षण कोटे के होते थे और उनका अंक यादि अनारक्षित जैसा होता था तो उनका परीक्षाफल अनारक्षित श्रेणी में किया जाता था. लेकिन पांचवे और छठे जेपीएससी के नियमों की बात करकें तो इसमें कुछ अलग ही मामला देखने को मिला. क्योंकि यदि परीक्षार्थी आरक्षण कोटे से है और उसने टॉप भी किया है तो भी उसका रिजल्ट टॉपर्स में ना आकर आरक्षण कोटे में ही होगा. जो कि सरासर गलत है.

इसे भी पढ़ें –   बजट सत्रः विधायकों के सवाल का कमाल का जवाब दे रहे पदाधिकारी, विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष भी हैरान-परेशान  

जेपीएससी की परीक्षा देने वाले छात्र वेदप्रकाश कहते हैं कि झारखंड गठन के बाद बिहार की नियुक्ति प्रक्रिया नियमावली 1951 को ही कुछ संशोधनों के साथ एडॉप किया गया है. पहले जो बिहार और पटना था, उसे सिर्फ झारखंड और रांची कर दिया गया है. जो सरकार को नीति से संबंधित सलाह देते हैं, गड़बड़ी करने में वो सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार हैं. किसी पार्टी की सरकार तो पांच साल के लिए ही होती है, लेकिन जो ब्‍यूरोक्रेट्स हैं वो झारखंड के छात्रों के अहित वाले नियमों को लागू करते हैं. उन्‍होंने सवाल उठाया है कि जब झारखंड में बिहार के नियमावली को लिया गया है, तब किस आधार पर यहां के कार्मिक के द्वारा हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर करके कहा जाता है कि यहां आरक्षण संबंधी कोई स्‍पष्‍ट नियमावली नहीं है. अगर स्‍पष्‍ट नियमावली नहीं था तो चौथे जेपीएससी तक पीटी में भी आपने आरक्षण का लाभ कैसे दिया.

इसे भी पढ़ें – गुरूग्राम मामले पर बोले केजरीवाल : आखिर कौन सा धर्म बच्चों के खिलाफ हिंसा सिखाता है?

देवेंद्र नाथ महतो कहते हैं कि जेपीएससी की तमाम नियुक्तियां त्रुटिपूर्ण हैं. इसके लिये मैं तीन विज्ञापनों का उदाहरण दूंगा. विज्ञापन संख्‍या 2/2016 में तेनुघाट विद्युत निगम से संबंधित हैं, विज्ञापन संख्‍या 3/2016 जो उर्जा विकास निगम लिमिटेड का है और 23/2016 झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़ा है. यह तीनों विज्ञापन एक समय का निकला हुआ है, लेकिन तीनों विज्ञापन में आरक्षण के लिए जो जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है, वह अलग-अलग मांगा जा रहा है. आरक्षण को लागू करने के लिए जेपीएससी और कार्मिक विभाग के पास कोई ठोस नियमावली नहीं है. सभी विज्ञापन त्रुटिपूर्ण हैं और यह षडयंत्र के तहत हो रहा है.

उमेश महतो कहते हैं कि जेपीएससी और सरकार की गलती का खामियाजा हमलोगों को उठाना पड़ा रहा है. मैं अपनी बात करूं तो मैं बेरोजगार हूं और गरीब परिवार से हूं. दारोगा बहाली में न्‍यूनतम उम्रसीमा 26 साल तय की जाती है. रिजल्‍ट जारी करने में बहुत लापरवाही बरती जा रही है. रिजल्‍ट का नार्मलाइजेशन 53 अंक है, जबकि उसके द्वारा जारी उत्‍तर पुस्तिका के अनुसार मेरे 55 अंक आते हैं और मुझे फेल कर दिया जाता है. मुझे अपनी उत्‍तर पुस्तिका भी नहीं दिखायी जाती है, बहुत धांधली और सेटिंग की जाती है.

29 जनवरी 2018 से मेन्स की परीक्षा रद्द कर दी गयी है. मगर छात्रों को भरोसा नहीं हो रहा है. कई छात्रों की ज़िंदगी बर्बाद हो गयी. आप उनसे बात कीजिए, रो देंगे. कइयों के माता-पिता दुनिया से चल बसे इस इंतज़ार में कि बेटा कंपटिशन में पास कर अफसर बनेगा.

इसे भी पढ़ें – अंकल… आपको अगर एक मंत्रालय मिल जाये न… तो आप ये शर्म-वर्म सब भूल जाओगे

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button