
Pravin Kumar, Garhwa: जहां नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था. नक्सलियों द्वारा जन अदालत लगाकर दोषी लोगों को सजा देने की रवायत रही थी, अब उन इलाकों में सामाजिक अंकेक्षण दल द्वारा की जा रही सोसल ऑडिट में सरकारी पदाधिकारी एवं मुखिया के द्वारा मनरेगा जैसी योजनाओं में की गई गड़बड़ी के खिलाफ जनमानस खड़ा होकर सामाजिक अंकेक्षण में प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं. सरकार की विकास योजनाओं के धन की बदरबांट के खिलाफ उठ खड़े हो रहे हैं. यह वही इलाका है जो झारखंड और छत्तीसगढ़ से सटा हुआ है. झारखंड का यह हिस्सा गढ़वा जिले के बूढ़ा पहाड़ के ठीक नीचे अवस्थित है.

मामला सोशल ऑडिट के दौरान प्रमाणित हुआ
गढ़वा जिला के बरगड़ प्रखंड के परसवार पंचायत में मनरेगा के तहत चली योजना में 17लाख 84 हजार रूपया गबन का मामला सोसल ऑडिट के दौरान प्रमाणित हुआ है. सरकार की विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आ रही है. जो योजना धरातल पर है ही नहीं उन योजनाओं का धन सरकारी खाते से निकाल लिया गया, साथ ही मजदूरों के नाम पर भी लाखों रुपऐ निकाले गये जबकि मजदूरों को इस निकासी की किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं थी. फर्जी अकाउंट खोल कर पैसे डाले गये फिर प्रखंड पंचायत के पदाधिकारियों की मिली भगत से 17 लाख 84 हजार रुपए का गबन किया गया. सरकार के विकास योजना के तहत वर्ष 2016 और 2017 वित्त वर्ष में डोभा एवं जल स्रोतों को विकसित करना था. जिसके तहत कूप निर्माण और डोभा का निर्माण पूरे राज्य में किया गया. डोभा निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी बात रखी. जिसे जल संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य के लिए सराहा गया. जबकि इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है.
फर्जी निकासी के कई मामले सामने आये
परसवार पंचायत में की गई सोशल ऑडिट में मनरेगा के तहत सरकारी धन के लूट का मामला सामने आया. संजय कुजूर का आवेदन डोभा निर्माण योजना के तहत स्वीकृत किया गया था. जिसकी कुल लागत 20 हजार 67 रुपए थी लेकिन इस योजना में भुगतान 42 हजार 84 रुपए किया गया.
सरकार का दावा पंचायत को दे रहे अधिकार
पंचायत में ऐसी योजना को भी लागू किया गया जिसे ग्राम सभा से पास नहीं किया गया था. उपरी तौर पर ऐसी योजना को स्वीकृति प्रदान कर 8 लाख 94 हजार 256 रुपये की निकासी की गई जो ग्राम सभा के रजिस्टर में दर्ज नहीं है.
राजकुमार यादव बताते हैं मेरी पत्नी सुभासो देवी के नाम पर डोभा योजना के तहत आवेदन स्वीकृत की गई थी. जिसकी जानकारी हमें समाजिक अंकेक्षण के दौरान हुई. मेरी पत्नी सुभासो देवी की मौत हुए 10 साल हो गए. फिर भी उसे लाभुक बनाया गया. मेरे नाम से फर्जी खाता भी बैंक में खोला गया और उसमें पैसे डाल कर दलालों ने योजना की पूरी राशि निकल ली. जबकि आज तक मेरा बैंक खाता किसी बैंक में नहीं है. न ही डोभा हमें मिला है. ऐसे कई मामले पंचायत में दिखे.
बिना काम किये 34 लाख 5 हजार 159 रुपए की मजदूरी का भुगतान किया गया
सरकार का यह दावा कि पंचायत को मजबूत करेंगे खोखला साबित हुआ. डोभा और कुआं निर्माण की योजना के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति जरूरी थी जबकि पंचायत में इन योजनाओं के नाम पर 30 मजदूरों को बिना काम किये मास्टर रोल में काम दिखाया गया. फिर उस पैसे को मजदूर के बैंक खाते से दलाल और पंचायत की मुखिया एवं रोजगार सेवक ने बैंक से मिलीभगत कर 34 लाख 5 हजार 159 रुपए की निकासी कर ली गई. मजदूरों ने अंकेक्षण के दौरान कहा की हम मनरेगा के तहत काम किये ही नहीं फिर भी हमारे खाते में मजदूरी का भुगतान किया गया और फिर निकाल लिया गया.
मुखिया पर भी घूस लेने का आरोप लगा
मनरेगा मजदूर कहते हैं कि परसवार पंचायत के रोजगार सेवक कुवार सिंह योजना में तो गड़बडी करते ही हैं जॅाब कार्ड बनाने में भी प्रति जॉब कार्ड दो सौ रुपए की राशि मांगते हैं. पंचायत में कई ऐसे जॉब कार्ड मिले, जिसमें मजदूरों की फोटो और हस्ताक्षर नहीं थे.
क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी, विपिन कुमार भारती
बरगड़ प्रखंड के चार पंचायत में सोशल ऑडिट किया गया, जिसमें योजना लागू करने में घोर अनियमितता और गड़बड़ी के प्रमाण सोशल ऑडिट के माध्यम से उजागर हुआ है. योजनाओं को लागू करने की निगरानी सही ढंग से नहीं होने के कारण मुखिया से लेकर रोजगार सेवक तक ने इसमें गड़बड़ी की. जूरी सदस्यों के अनुसार नियमसम्मत कार्रवाई की जाएगी. डोभा एवं कुआं निर्माण के कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है. करीब 18 लाख रुपए के सरकारी धन का गबन किया गया. जिसका प्रमाणित दस्तावेज सोशल ऑडिट टीम ने जमा किया. साथ ही तमाम योजनाओं में जहां पर गड़बड़ी हुई है और जिन लोगो ने गड़बड़ी की है उन लोगों से पूरी राशि रिकवरी का आदेश जूरी सदस्यों ने दिया है जिसका पालन किया जएगा.
परसवार मुखिया, ललिता बखला
मनरेगा के तहत चली योजना में करीब 18लाख की गड़बड़ी पकड़ी गई है. जिसपर मुझसे रोजगार सेवक ने हस्ताक्षर करा लिये हैं. इस बारे में मुझे जानकारी नहीं थी. रोजगार सेवक पेमेंट के दिन मुझसे मास्टर रोल में हस्ताक्षर करने के लिए दस्तावेज मेरे पास लाते थे. जूरी सदस्यों के द्वारा जुर्मना लगया गया है जिसका भुगतान करूंगी.
सामाजिक कार्यकर्ता जेपी मिंज कहते हैं कि योजनाओं की राशि का बंदरबांट सिर्फ मुखिया और पंचायत सेवक द्वारा ही नहीं किया गया बल्कि इसमें जिला के वरीय पदाधिकारी भी शामिल हैं. ऐसे भी दस्तावेज सामाजिक अंकेक्षण के दौरान आये जिसमें किस-किस पदाधिकारी को कितना घूस दिया गया जानकारी दी गयी थी. पंचायत में चली योजनाओं में गड़बड़ी सामाजिक अंकेक्षण में साबित हुई है. करीब 18 लाख रुपए की गड़बड़ी की गई है, जिसकी जुर्माने के साथ रिकवरी के आदेश जूरी सदस्यों ने दे दिये हैं. इसे पूरा करने का दयित्व प्रखंड विकास पदाधिकारी का है.
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