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भारत में जितनी मूर्तियां महात्मा गांधी की नहीं हैं उनसे ज्यादा मूर्तियां भीमराव आंबेडकर की हैं, फिर भी युवाओं को आंबेडकर की पूरी जानकारी नहीं

Ranchi : बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित सेमिनार में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर ( ईएलएल ) के कोऑर्डिनेटर डॉ विनय भरत ने कहा कि भारत में जितनी मूर्तियां महात्मा गांधी की नहीं हैं उनसे ज्यादा मूर्तियां भीमराव आंबेडकर की हैं. इसके बावजूद भारत के युवाओं के पास भीमराव आंबेडकर की पूरी जानकारी नहीं है.

डॉ. भरत ने कहा कि अमूमन लोग उन्हें सिर्फ संविधान निर्माता के तौर पर जानते हैं, लेकिन वह यह नहीं जानते कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर भारत के न सिर्फ पहले कानून मंत्री रहे बल्कि उन्होंने फाईनांस कमीशन और आरबीआइ को बनाने में मुख्य भूमिका अदा की. साथ ही महिला अधिकारों के प्रणेता रहे. हिंदू मैरिज कोड के तहत सम्पत्ति में औरतों को बराबरी का हक, कार्यस्थल पर औरतों को मेटरनिटी लीव और श्रम कानून में आवश्यक सुधार करते हुए 12 घंटे से कार्य अवधि को घटा कर 8 घंटे पर लाया.

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साथ ही दामोदर घाटी परियोजना और जल संसाधन प्रबंधन में भी अद्भुत काम किया. रोजगार एक्सचेंज और प्रोविडेंट फंड जैसे वित्तीय सुधार में उन्होंने अहम भूमिका अदा की.

शिक्षिका नम्रता झा ने कहा कि “बाबा साहब भीमराव आंबेडकर न सिर्फ एक खास वर्ग के पुरोधा रहे बल्कि गांधी के बरअक्स उन्होंने एक समानांतर विचारधारा खड़ी की, जिससे समाज में समानता का अधिकार न सिर्फ वंचितों को प्राप्त हुआ बल्कि भारत की समस्त स्त्रियों को भी प्राप्त हुआ.

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गुलाम भारत में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के बचपन के संघर्षों को देख कर आजाद भारत में समानता के तल पर समाज को खड़ा होते हुए देख कर यह सुकून मिलता है कि बाबा साहेब का सपनों का भारत लगभग अब बन चुका है. वक्त के साथ जो कमियां रह गयी हैं, वो आज के युवा पूरा करेंगे.”

इस मौके पर ईएलएल विभाग के शिक्षक सौरव मुखर्जी ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने फ्रांस की क्रांति से प्रेरित होकर बराबरी, स्वतंत्रता और बंधुता के संदेश को भारतीय पृष्ठभूमि में सफल बनाया. और उनका पूरा जीवन समानता के अधिकार को स्थापित करने में समर्पित रहा.

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शिक्षक कर्मा कुमार ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का बचपन संघर्षों के काले बादलों के बीच गुजरा, पर इन्हीं बादलों में से उन्होंने उम्मीद की लकीरें खींचीं. अनेक विषयों में उन्होंने लंदन और कोलम्बिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण की और उनका एक साथ शिक्षाविद, कानूनविद, समाजशास्त्री, राजनीतिक वैज्ञानिक होना उन्हें मानव से महामानव बनाता है.

ईएलएल विभाग की छात्रा प्राची सिंह, सुरभि कुमारी और सामिया यास्मीन ने भी अपने विचार रखे. इस मौके पर विभाग के तकरीबन 150 छात्र मौजूद थे.

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