
Ranchi : जिस उम्मीद के साथ झारखंड में टेक्निकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गयी थी वो धरातल से ज्यादा कागजों में पूरा हो रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह, यहां अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है. आलम यह है कि इस विश्वविद्यालय को स्थापित हुए चार साल से अधिक होने को है पर आज तक अधिकारियों कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है. यही वजह है कि जो अधिकार इस विश्वविद्यालय को मिले हुए हैं उसका भी इस्तेमाल विश्वविद्यालय नहीं कर पा रहा है.
कौन से अधिकार का नहीं कर पा रहा इस्तेमाल
बताते चलें कि इस विश्वविद्यालय में पिछले पांच एकेडमिक सत्र से पढाई हो रही है. इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत राज्य के तमाम तकनीकी शिक्षा देने वाले संस्थान आते हैं. यह विश्वविद्यालय एक स्वायत्त विश्वविद्यालय के रुप में काम करता है. ऐसे में विश्वविद्यालय को यह अधिकार है कि वो अपने तमाम संस्थान के तमाम कोर्स में अपने अनुसार और अपनी नियमावली से एडमिशन ले. पर ऐसा विश्वविद्यालय नहीं कर पा रहा है. विश्वविद्यालय केवल अपने मास्टर्स कोर्स में भी अपने नियमानुसार एडमिशन ले रहा है. अन्य यूजी और डिप्लोमा कोर्सेस में यह झारखंड कंबाइंड एग्जामिनेशन बोर्ड की काउंसलिंग पर निर्भर रह रहा है. ऐसे में सेशन भी लेट हो जाता है.
इसे भी पढ़ें : Jharkhand: 600 से अधिक पुरानी स्लीपर बसों के वैध होने का रास्ता साफ, 15 अप्रैल तक वर्गीकरण का मिला समय
क्यों हो रहा है ऐसा
दरअसल यूनिवर्सिटी बनने से पहले राज्य के तकनीकी संस्थानों में स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के मार्फत एडमिशन होते थे. इसके नियमानुसार एडमिशन की काउंसलिंग प्रक्रिया झारखंड कंबाइंड एग्जामिनेशन बोर्ड करता था. यूनिवर्सिटी गठन के बाद स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन को झारखंड कंबाइंड बोर्ड में मर्ज कर दिया गया पर काउंसलिंग प्रक्रिया झारखंड कंबाइंड बोर्ड ही करती रही. इस वजह से अब तक यही चल रहा है.
क्या कहते हैं सक्षम अधिकारी
प्रभारी कुलपति विजय कुमार पांडेय के मुताबिक विश्वविद्यालय को इस बात की जानकारी है कि वो खुद से एडमिशन ले सकता है. अब तक बीटेक और डिप्लोमा कोर्सों में जेसीईसीबी के माध्यम से एडमिशन हो रहा है. जल्द ही विश्वविद्यालय खुद से एडमिशन लेने लगेगा. इसकी जानकारी राजभवन के साथ ही विभाग को भी दी जायेगी.
इसे भी पढ़ें : बिहार में अब कुत्ते ढूंढेंगे शराब, उत्पाद एवं निबंधन विभाग Sniffer Dogs की लेगी मदद




